विश्व स्वास्थ्य दिवस
विश्व स्वास्थ्य दिवस
World Health Day
विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने की शुरुआत 7 अप्रैल 1950 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा की गई। यह दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूरे विश्व में महामारी बन चुके कोरोना की सेवा प्रदाताओं नर्सों को इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस को समर्पित किया गया है।
विश्व में स्वास्थ्य समस्याओं, कारणों ,समीक्षा ,निदान व कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दृष्टि से यह दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल सन 1948 को हुई। भारत समेत 194 देश इसके सदस्य हैं व इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड जेनेवा में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन मानव जाति के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग व मानक विकसित करने की संस्था है। यह संपूर्ण मानव जाति के लिए स्वास्थ्य के उच्चतम संभव स्तर हेतु सहायता प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सिफारिशें प्रस्तुत करता है।
World Health Day
विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाने की शुरुआत 7 अप्रैल 1950 को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा की गई। यह दिवस विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थापना दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूरे विश्व में महामारी बन चुके कोरोना की सेवा प्रदाताओं नर्सों को इस वर्ष विश्व स्वास्थ्य दिवस को समर्पित किया गया है।
विश्व में स्वास्थ्य समस्याओं, कारणों ,समीक्षा ,निदान व कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दृष्टि से यह दिवस मनाया जाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना 7 अप्रैल सन 1948 को हुई। भारत समेत 194 देश इसके सदस्य हैं व इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड जेनेवा में है। विश्व स्वास्थ्य संगठन मानव जाति के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर आपसी सहयोग व मानक विकसित करने की संस्था है। यह संपूर्ण मानव जाति के लिए स्वास्थ्य के उच्चतम संभव स्तर हेतु सहायता प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य संबंधी मामलों में सिफारिशें प्रस्तुत करता है।
यह लोगों की अंतरराष्ट्रीय नामावली को शिक्षित व संशोधित करता है तथा खाद्य और औषधि पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण को विकसित एवं प्रोत्साहित करता है। इसके प्रमुख क्षेत्र मातृ नवजात बाल एवं किशोर, स्वास्थ्य संचारी रोग नियंत्रण, संचारी रोग एवं स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक, सार्वभौम स्वास्थ्य सेवा प्रसार, सतत विकास और स्वस्थ पर्यावरण स्वास्थ्य तंत्रों का विकास, स्वास्थ्य सुरक्षा और आपात स्थितियों से निपटना है।
यह तो हो गए कार्य विश्व स्वास्थ्य संगठन के लेकिन यह बात अच्छी तरह समझनी होगी कि जब तक किसी भी देश के सभी नागरिक सहयोगी नहीं बनेंगे तब तक किसी भी स्वास्थ्य चुनौती से निपटा नहीं जा सकेगा अतः देश के प्रत्येक नागरिक को युद्ध स्थिति स्वीकारते हुए अपने ही घर पर रहकर सोशल डिस्टेंस बनाकर इस युद्ध को जीतना होगा अन्यथा केवल दिशानिर्देशों को प्रदान करना स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना ही पर्याप्त ना होगा।
हमें अपनी आँखें जितनी जल्दी हो खोल लेनी चाहिए यह वक्त है आत्मचिंतन का प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त वक्त मिला है जिसमें वह अपने घर में रहकर अपने अंदर जाकर उन खास विषयों पर चिंतन करें। हमें स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए प्रकृति की ओर जाना होगा और प्रकृति को भी स्वस्थ व सुरक्षित रखना होगा तभी हम अपनी सुरक्षा की कल्पना कर सकेंगे। अन्यथा कोई न कोई और अन्य आपदा आन पड़ेगी। अतः हमें अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग होना होगा दिनचर्या में सुधार करना होगा, शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना होगा।
याद रखिए स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ व प्रगतिशील राष्ट्र की परिकल्पना को पूरा कर सकता है।
सुमन पांडेय,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरी मनौटी,
शिक्षा क्षेत्र -खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।

उत्कृष्ट रचना 🌹
ReplyDeleteउपयोगी लेख 🙏
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