झाँकी हिन्दुस्तान की

आओ बच्चों तुम्हें बताएँ गौरव कीर्ति हिन्दुस्तान की।
विद्यालयों ने सिखलायी, बात मान सम्मान की।।

देश का बच्चा-बच्चा देखो जान से सबको प्यारा है।
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सबको लगता दुलारा है।।
देश के इन बच्चों की खातिर तिलाञ्जलि दें अभिमान की।
गुरुओं को हम दें सम्मान, मान और अभिमान की।
आओ बच्चों तुम्हें बताएँ गौरव कीर्ति हिन्दुस्तान की।
विद्यालयों ने सिखलायी, बात मान सम्मान की।।

यहाँ के मौसम देखो जाड़े, गर्मी और बरसात हैं।
यहाँ के बच्चे; सूर्य की गर्मी, चन्द्रमा की शीतलता से शर्मात हैं।।
प्रकृति के दिए नि:शुल्क फल-फूल सौन्दर्य महान की।
झर-झर झरते झरने, प्रतिध्वनि करती कल-कल नदी समान की।।
आओ बच्चो तुम्हें बताएँ गौरव कीर्ति हिन्दुस्तान की।
विद्यालयों ने सिखलायी, बात मान सम्मान की।।

संस्कृति और सभ्यता की खातिर सबका मान रखा जाता है।
इस भूमण्डल में कोई, स्वयं को अकेला कभी न पाता है।।
गुरू वशिष्ठ और मुनियों के आन-बान और शान की।
ज्ञान के भण्डार यहाँ रामायण, गीता, वेद, पुराण, कुरान की।।
आओ बच्चो तुम्हें बताएँ गौरव कीर्ति हिन्दुस्तान की।
विद्यालयों ने सिखलायी, बात मान सम्मान की।।

पूरब-पश्चिम, उत्तर -दक्षिण, फैली चारो तरफ खुशहालियाँ।
विदेशी धरती चले कूटनीति, अपनी तो वसुधैव कुटुंबकुम नीति पहचानियाँ।।
इस क्यारी में खिले फूल हैं, खुशियाँ मिले जहान की।
ममता से है ओतप्रोत, ये धरती हिन्दुस्तान की।।
आओ बचचो तुम्हें बताएँ गौरव कीर्ति हिन्दुस्तान की।
विद्यालयों ने सिखलायी, बात मान सम्मान की।।

इस धरती का कोना-कोना; तप की महान मिसाल है।
इसीलिए ही शायद फिरंगी; फेंकते रहते अपना जाल है।।
हर बच्चा कूटनीति को तोड़ेगा; कसम लेगा भारत के अभिमान की।
पुन: बनाएगा विश्वगुरू; करेगा रक्षा देश के स्वाभिमान की।।
आओ बच्चों तुम्हें बताएँ गौरव कीर्ति हिन्दुस्तान की।
विद्यालयों ने सिखलायी, बात मान सम्मान की।।
वंदेमातरम! वंदेमातरम! वंदेमातरम!
                 
रचयिता
नरेन्द्र सैंगर,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय बरकातपुर,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।

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