ये कैसी परीक्षा ले रही माई

ये कैसी परीक्षा ले रही माई
तेरे दर्शन को अखियाँ अकुलायीं
लोटे में जल भर, ले दीपक और बाती
पुष्प माल लिए हाथों में
पूजा की थाली है सजायी
पर माँ तेरे दर तक न आ पायी
ये कैसी परीक्षा ले रही माई
तेरे दर्शन को अखियाँ अकुलायीं

सभी भक्तगण व्याकुल तेरे दरश को
पर सबके पैर बाँध दिये चौखट में
फैली ऐसी महामारी सम्पूर्ण जगत में
इसका न कोई उपचार न ही दवाई
ये कैसी परीक्षा ले रही माई
तेरे दर्शन को अखियाँ अकुलायीं

जब-जब अत्याचार बढ़ा असुरों का
रूप कराल काली का धर
नेत्र लाल भृकुटि विकराल कर
असुरों के मुण्ड काट ले आयी
ये कैसी परीक्षा ले रही माई
तेरे दर्शन को अखियाँ अकुलायीं

तू ही काली तू ही कल्याणी
तू ही जगदम्बा महामाई
कर संहार इस अदृश्य दानव का
अब एक तू ही सहारा माई
ये कैसी परीक्षा ले रही माई
तेरे दर्शन को अखियाँ अकुलायीं

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

Comments

Total Pageviews