मतलबी लोग
न कोई परेशानी न हालात न ही मुझे कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
मुस्कुराहटें इनके चेहरों पर और दिल में फरेब होता है,
समझते हैं जिसे खासियत वही इनका ऐब होता है।
बातें विश्वास और भरोसे की बेईमानी सी लगती हैं,
मतलबी इस दुनिया में वफा अनजानी सी लगती है।
न कोई परेशानी न हालात न ही मुझे कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
नकाब अच्छाई का होता है इनके छुपे हुए चेहरों में,
अक्सर देर लग जाती है मतलबी लोगों को जानने में।
मुझे पल भर लगता है किसी को अपना मानने में,
एक उम्र लग जाती है मतलबी लोगों को जानने में।
न कोई परेशानी न हालात न ही मुझे कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
धोखे मिलते हैं हर कदम इस दुनिया इस जमाने में,
हर तरफ भीड़ लेकिन अफसोस मतलबी हैं जमाने में।
मतलबी लोगों से भरी पडी हैं कहानियाँ अखबारों में,
प्यार से कोई बोल दे तो मेहरबानी सी लगती है जमाने में।
न कोई परेशानी न हालात न ही मुझे कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
मुस्कुराहटें इनके चेहरों पर और दिल में फरेब होता है,
समझते हैं जिसे खासियत वही इनका ऐब होता है।
बातें विश्वास और भरोसे की बेईमानी सी लगती हैं,
मतलबी इस दुनिया में वफा अनजानी सी लगती है।
न कोई परेशानी न हालात न ही मुझे कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
नकाब अच्छाई का होता है इनके छुपे हुए चेहरों में,
अक्सर देर लग जाती है मतलबी लोगों को जानने में।
मुझे पल भर लगता है किसी को अपना मानने में,
एक उम्र लग जाती है मतलबी लोगों को जानने में।
न कोई परेशानी न हालात न ही मुझे कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
धोखे मिलते हैं हर कदम इस दुनिया इस जमाने में,
हर तरफ भीड़ लेकिन अफसोस मतलबी हैं जमाने में।
मतलबी लोगों से भरी पडी हैं कहानियाँ अखबारों में,
प्यार से कोई बोल दे तो मेहरबानी सी लगती है जमाने में।
न कोई परेशानी न हालात न ही मुझे कोई रोग है,
जिन्होंने हमें सताया वो कोई और नहीं मतलबी लोग हैं।
रचयिता
नवनीत शुक्ल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय भैरवां द्वितीय,
शिक्षा क्षेत्र-हसवा,
जनपद-फतेहपुर।

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