पृथ्वी दिवस मनाना है
निज अपना मान बचाने को,
वो पल-पल हमें पुकार रही
अपने अंदर की पीड़ा को,
करके विनाश को बखान रही।
जल जीवन है,
भू जननी है,
इस बात को हम बतलाते हैं।
निज स्वार्थहित वशीभूत होकर,
इसे दुर्गम क्षति पहुँचाते हैं।।
होते विनाश बढ़ती विपदा,
दुःख के प्रतीक को सिद्ध करे।
आओ हम सब अब मिलजुल कर,
भू की विपदा को दूर करे।।
कर ले संकल्प, निभाए वचन,
इस धरा का मान बढ़ाना है।
इस अमिट छाप को धारण कर,
यह पृथ्वी दिवस मनाना है।।
यह पृथ्वी दिवस मनाना है
रचयिता
हिमांशु सक्सेना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रायपुर धीरपुर,
विकास खण्ड-दातागंज,
जनपद-बदायूँ।
वो पल-पल हमें पुकार रही
अपने अंदर की पीड़ा को,
करके विनाश को बखान रही।
जल जीवन है,
भू जननी है,
इस बात को हम बतलाते हैं।
निज स्वार्थहित वशीभूत होकर,
इसे दुर्गम क्षति पहुँचाते हैं।।
होते विनाश बढ़ती विपदा,
दुःख के प्रतीक को सिद्ध करे।
आओ हम सब अब मिलजुल कर,
भू की विपदा को दूर करे।।
कर ले संकल्प, निभाए वचन,
इस धरा का मान बढ़ाना है।
इस अमिट छाप को धारण कर,
यह पृथ्वी दिवस मनाना है।।
यह पृथ्वी दिवस मनाना है
रचयिता
हिमांशु सक्सेना,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय रायपुर धीरपुर,
विकास खण्ड-दातागंज,
जनपद-बदायूँ।

Superbb
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