वसुधा की पुकार

वसुधा कहती सुन लो मेरी पुकार।
बन्द करो अब मही पर अत्याचार।

बाइस अप्रैल को पृथ्वी दिवस हैं मनाते।
साफ - स्वच्छ रखेंगे, कसमें हैं सब खाते।
रोपित करें वृक्ष धरा पर अबकी बार।

वसुधा कहती सुन लो मेरी पुकार।

जीवन दायिनी वसुंधरा माँ हूँ तेरी।
भरण पोषण कर रक्षा करती हूँ  तेरी।
प्रकृति का मैं हूँ अनमोल उपहार।
वसुधा कहती सुन लो मेरी पुकार।

वक्षस्थल को मेरे मत क्षति पहुँचाओ तुम
धरा के आभूषण विटप को मत काटो तुम।
ऑक्सीजन कम दूषित पवन के हो जिम्मेदार।

वसुधा कहती सुन लो मेरी पुकार।

कराह उठी अब धरती माता।
द्रुम, शिखर, सरिता से मेरा नाता।
नत-मस्तक हो पूजा कर, न करो अत्याचार।

वसुधा कहती सुन लो मेरी पुकार

सौर मंडल का अद्भुत ग्रह हूँ मैं।
अथाह नीर का भण्डार हूँ मैं।
 फिर भी बड़ी वेदना झेल रही हूँ मैं।
मानव करे पर्यावरण पर प्रहार।

वसुधा कहती सुन लो मेरी पुकार।
बन्द करो मही पर अब अत्याचार।

रचयिता
प्रतिमा उमराव,
सहायक शिक्षिका,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय अमौली,
विकास खण्ड-अमौली,
जनपद-फतेहपुर।

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