नवीन सत्र में शिक्षत्व का परिष्करण
आज जहाँ नवीन शैक्षिक सत्र का आरम्भ हो रहा है और हम सभी देश के प्रति अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निभाते हुए घर में हैं ऐसे में हमारे पास समय है Home work करने का। जैसा कि हम सभी जानते है कि प्रदेश में शैक्षिक गुणवत्ता उन्नयन की दिशा में महत्वाकांक्षी योजना मिशन प्रेरणा का आरम्भ किया गया है जिसे सफल बनाने के लिए हम सभी शिक्षकों को अपने कर्त्तव्य के प्रति ज्यादा सजगता से प्रयास करने हैं तो ऐसे में इस लाॅकडाउन की अवधि में हम सभी कुछ homework कर सकते हैं ..
जैसे
आधारशिला, ध्यानाकर्षण, शिक्षण संग्रह को विस्तार से पढ़ना।
विद्यालय की समय सारणी का निर्माण कर साथी शिक्षकों से साझा करना।
समय सारणी के अनुसार अपने विषय की शिक्षण योजना तैयार करना, tlm बनाना, नवीन गतिविधियाँ सोचना।
शिक्षक डायरी तैयार करना, प्रेरणा तालिका, प्रेरणा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए, प्रेरक कक्षा, प्रेरक विद्यालय बनाने के लिए अपनी साप्ताहिक, मासिक, वार्षिक कार्ययोजना तैयार करना।
इस समय विद्यालय के whatsapp group की सहायता से हम बच्चों को कुछ कार्य भी दे सकते हैं। इससे हमारे सभी छात्र नही जुड़ सकते हैं परन्तु कुछ बच्चों को लाभ अवश्य मिल सकता है।
अब बात करते हैं व्यक्तित्व विकास की ...
विगत कुछ माह मे आप सभी के विद्यालयों में SRG's और ARP's के अनुश्रवण में आपने ERAC के विषय में सुना होगा और पहली बार लगा होगा ये क्या नई बला आ गई है।
आपने डार्विन का सिद्धान्त "योग्यतम की उत्तरजीविका" पढ़ा होगा। यह सिद्धान्त हमारे जीवन के हर पहलू पर लागू होता है और सीख देता है कि हमें निरंतर अपने व्यक्तित्व विकास के लिए समय की माँग के अनुसार आवश्यक बदलाव करने चाहिए। इसी दिशा में हमारे विचार से ERAC का हमारे शिक्षक जीवन में व्यापक अर्थ इस प्रकार हो सकता है
E ... Evaluation / Ethics
R .. Reading / Research
A ... Ability / Attitude
C ... Commitment /Competition
Evaluation /Ethics
मूल्यांकन / नैतिकता
सबसे पहले हमें अपना मूल्यांकन स्वयं करना चाहिए कि क्या जितनी मेहनत और लगन BEd, BTC , TET, Super tet करने के लिए हमने की थी आज भी हम वही दिन-रात की मेहनत अपने काम में कर रहे हैं? एक आदर्श शिक्षक की जो विशेषताएँ हमने B.Ed. BTC के पाठ्यक्रम में पढ़ी थीं उनमें से हम स्वयं मे कितनी विशेषताएँ देखते हैं?
शिक्षक को जो राष्ट्र निर्माता, भविष्य निर्माता की संज्ञा दी गई है क्या हम उस दिशा में प्रतिदिन कुछ प्रयास कर रहे हैं?
इस तरह का आत्ममूल्यांकन हमें प्रतिदिन करना चाहिए यह दर्पण में स्वयं का वास्तविक प्रतिबिम्ब देखने जैसा है।
Ethics नैतिकता
शिक्षक को प्रत्येक परिस्थिति में नैतिकता का पालन करना चाहिए। बच्चे बहुत कुछ हमारे व्यवहार से ही सीखते हैं। जब हमारे अंदर नैतिक मूल्य जीवित होगे तभी हम बच्चों में उन मूल्यों का विकास कर सकते है क्योंकि जो हमारे पास होता है वही हम दूसरों को दे सकते है।
R Reading / Research
पढ़ना / अनुसंधान
एक शिक्षक को वैचारिक स्तर पर हमेशा मजबूत होना चाहिए और "बर्नार्ड शाॅ ने कहा है कि विचारों के युद्ध में पुस्तकें ही अस्त्र हैं।" अत: एक शिक्षक को हमेशा विद्यार्थी बने रहना चाहिए। हमे निरंतर महान और प्रेरक व्यक्तित्व को पढ़ने की आदत अपनी दिनचर्या में भोजन की तरह ही शामिल करनी चाहिए।
शिक्षण एक अनुसंधान का विषय है और प्रत्येक शिक्षक को निरंतर अनुसंधान करते रहना चाहिए कि वह क्या बेहतर तरीका खोज सकता है जिससे उसके विद्यार्थियों को ज्यादा लाभ मिल सकता है। प्रत्येक विद्यालय की परिस्थितियाँ भिन्न होती हैं, प्रत्येक शिक्षक, विद्यार्थी में भिन्नता होती है एक शिक्षक रोल प्ले गतिविधि से शिक्षण करते हुए ज्यादा प्रभावी परिणाम प्राप्त कर सकता है तो दूसरा खेल-खेल में शिक्षण विधि से ज्यादा प्रभावी परिणाम प्राप्त कर सकता है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक को इस दिशा में निरंतर अनुसंधान करना चाहिए और शिक्षण को ज्यादा सुगम और प्रभावी बनाने के तरीके खोजने चाहिए।
Ability /Attitude...
योग्यता और नज़रिया
प्रत्येक इंसान में अपार योग्यता होती है किसी भी असंभव से दिखने वाले कार्य को करने की, कठिन परिस्थितियों में भी समस्याओं के समाधान खोजने की। हमें अपने अंदर की असीमित योग्यताओं पर विश्वास करना चाहिए और उनका पूर्ण उपयोग करना चाहिए और साथ ही बच्चों की योग्यता पर भी भरोसा रखना चाहिए।
इसके बाद आता है हमारे व्यक्तित्व का सर्वाधिक महत्वपूर्ण पहलू हमारा नजरिया जिसे हमें हर समय, हर परिस्थिति में सकारात्मक और आशावादी रखना चाहिए। हम सभी के विद्यालयों में अनेक समस्याएँ है हमें इन समस्याओं के आगे स्वयं को कभी भी थका हुआ, हारा हुआ नहीं समझना चाहिए। हमेशा इनका हल ढूँढते हुए आगे बढ़ने के प्रयास करते रहना चाहिए क्योकि हर समस्या अपने आपमें एक अवसर होती है कुछ नया करने का।
Commitment / Competition
जिस प्रकार हम सभी अपने परिवार के प्रति वचनबद्ध होते हैं उसी प्रकार हमें वचनबद्ध होना चाहिए अपनी शिक्षक के रूप में जिम्मेदारियों के प्रति, अपने छात्रों के प्रति, अपने विद्यालय के प्रति, अपने समाज और राष्ट्र के प्रति।
Competition हमें हमेशा स्वयं से करना चाहिए किसी दूसरे से नहीं और निरंतर जो हम आज हैं कल उससे बेहतर रूप मे स्वयं को तैैैयार करना चाहिए।
इस ERAC को यदि हम अपने व्यवहार में अपनाते हैं तो शिक्षण से जुड़ी अनेक समस्याओं का समाधान हमें स्वत: ही मिल जाएगा।
हमारा संकल्प
हमारे देश के ग्यारहवें राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ0 कलाम साहब ने एक सपना देखा था विजन 2020 । डॉ0 कलाम स्वयं को हमेशा एक शिक्षक समझते थे तो हमारा सभी शिक्षक साथियों से विन्रम निवेदन है कि हम सभी इस संकल्प के साथ नवीन सत्र की शुरूआत करें कि डॉ0 कलाम का सपना हमारा है और हम सभी अपने सर्वोत्तम प्रयास करते हुए इसे साकार करने का प्रयास करेंगे और डॉ0 कलाम को सच्ची श्रंद्धाजलि अर्पित करेंगे। साथ ही मिशन प्रेरणा को सफल बनाते हुए अपनी कक्षा, अपने विद्यालय, अपने विकास खण्ड और अपने जनपद को प्रेरक बनाएँगे।
अंत में डॉ0 कलाम की ये पंक्तियाँ हमें इस सपने को साकार करने में प्रेरक का कार्य करेगी कि
अगर सूरज की तरह चमकना चाहते हो तो सूरज की तरह तपना सीखो।

बहुत सुंदर
ReplyDeleteअत्यंत उत्तम लेख है
ReplyDeleteAppropiate thinking
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