नन्हा सा मन
कहता है नन्हा सा मन
कहाँ चला धीरे-धीरे
आँखों में सपने लेकर
मन में उम्मीद जगाकर
कहता है नन्हा सा मन।
पल-पल सोच रहा है
जीवन में कुछ करना है
हर पल आगे है बढ़ना
मंजिल है अपनी पाना
कहता है नन्हा सा मन।
जहाँ पर खुलती अनेक राहें
कठिन को भी सरल बनाते
ऐसा है वो स्कूल मेरा
सुन्दर मंदिर हो जैसा
कहता है नन्हा सा मन।
मेरा सब बच्चों से कहना
स्कूल है सबको जाना
घर पर कोई नहीं रहेगा
पढ़ने सबको है जाना
कहता है नन्हा सा मन।
अम्मा बस्ता लेकर आना
दीदी संग पढ़ने है जाना
पढ़ना-लिखना, खेलना-कूदना
ये सब स्कूल में ही करना
कहता है नन्हा सा मन।
रचयिता
गीता कठैत,
प्रधानाध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नागराजाधार,
विकास खण्ड-कड़ाकोट कीर्तिनगर,
जनपद-टेहरी गढ़वाल।
कहाँ चला धीरे-धीरे
आँखों में सपने लेकर
मन में उम्मीद जगाकर
कहता है नन्हा सा मन।
पल-पल सोच रहा है
जीवन में कुछ करना है
हर पल आगे है बढ़ना
मंजिल है अपनी पाना
कहता है नन्हा सा मन।
जहाँ पर खुलती अनेक राहें
कठिन को भी सरल बनाते
ऐसा है वो स्कूल मेरा
सुन्दर मंदिर हो जैसा
कहता है नन्हा सा मन।
मेरा सब बच्चों से कहना
स्कूल है सबको जाना
घर पर कोई नहीं रहेगा
पढ़ने सबको है जाना
कहता है नन्हा सा मन।
अम्मा बस्ता लेकर आना
दीदी संग पढ़ने है जाना
पढ़ना-लिखना, खेलना-कूदना
ये सब स्कूल में ही करना
कहता है नन्हा सा मन।
रचयिता
गीता कठैत,
प्रधानाध्यापक,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नागराजाधार,
विकास खण्ड-कड़ाकोट कीर्तिनगर,
जनपद-टेहरी गढ़वाल।

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