चतुर किसान
कक्षा-2 की कहानी का काव्य रूपांतरण
एक किसान था बहुत चालू,
नाम था उसका कालू।
जब खेत रहा था जोत,
तभी आ गया एक भालू।
भालू ने किसान को,
मारने के लिए दौड़ा।
तभी किसान डरते हुए,
हाथ जोड़कर बोला।
फसल आने दो भालू भाई,
जो कहोगे वो दे दूँगा।
भालू बोला ठीक है जा,
ऊपर की फसल मैं लूँगा।
किसान बो दिया आलू,
क्योंकि वह था चालू।
फसल तैयार होते ही,
हिस्सा लेने आया भालू।
भालू को मिले केवल पत्ते,
किसान ले गया सारे आलू।
अपनी मूर्खता को देख,
खूब खिसियाया देखो भालू।
भालू बोला अबकी बार,
जमीन के नीचे की फसल है मेरी।
जमीन के ऊपर वाली,
सारी फसल है तेरी।
अगली बार किसान ने,
बोया खेत में गेहूँ।
भालू को मिली सिर्फ जड़ें,
किसान को चमकीले गेहूँ।
भालू गुस्से में आकर,
किसान से यूँ बोला-
जमीन के ऊपर और नीचे की,
दोनों फसल है मेरी।
बीच वाला भाग बचा जो,
वो होगी अब तेरी।
इस बार किसान ने,
खेत में गन्ना लगाया।
भालू को मिले जड़ और पत्ते,
उसका सिर चकराया।
इस तरह किसान भालू को,
बुद्धि से मुर्ख बनाया।
बताओ बच्चों कहानी सुनकर,
कितना मज़ा आया।
रचयिता
एक किसान था बहुत चालू,
नाम था उसका कालू।
जब खेत रहा था जोत,
तभी आ गया एक भालू।
भालू ने किसान को,
मारने के लिए दौड़ा।
तभी किसान डरते हुए,
हाथ जोड़कर बोला।
फसल आने दो भालू भाई,
जो कहोगे वो दे दूँगा।
भालू बोला ठीक है जा,
ऊपर की फसल मैं लूँगा।
किसान बो दिया आलू,
क्योंकि वह था चालू।
फसल तैयार होते ही,
हिस्सा लेने आया भालू।
भालू को मिले केवल पत्ते,
किसान ले गया सारे आलू।
अपनी मूर्खता को देख,
खूब खिसियाया देखो भालू।
भालू बोला अबकी बार,
जमीन के नीचे की फसल है मेरी।
जमीन के ऊपर वाली,
सारी फसल है तेरी।
अगली बार किसान ने,
बोया खेत में गेहूँ।
भालू को मिली सिर्फ जड़ें,
किसान को चमकीले गेहूँ।
भालू गुस्से में आकर,
किसान से यूँ बोला-
जमीन के ऊपर और नीचे की,
दोनों फसल है मेरी।
बीच वाला भाग बचा जो,
वो होगी अब तेरी।
इस बार किसान ने,
खेत में गन्ना लगाया।
भालू को मिले जड़ और पत्ते,
उसका सिर चकराया।
इस तरह किसान भालू को,
बुद्धि से मुर्ख बनाया।
बताओ बच्चों कहानी सुनकर,
कितना मज़ा आया।
रचयिता
मनोहर लाल गौतम,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय कनिगवाॅ,
विकास खंड -बीसलपुर,

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