नारी की यह जीवन लीला
नारी की यह जीवन लीला,
त्याग समर्पण और बलिदानी,
देखो कैसा मिश्रित रूप,
अधरों पर मुस्कान और आँखों में पानी।
सदियों से यह रीत चली आई,
हँसती गाती प्रीत चली आई,
खुद चाहे जितना कष्ट सहे,
निज मुख से तनिक न आह कहे।
हो तुम करुणा की वह निशानी,
अधरों पर मुस्कान और आँखों में पानी।
जब भी किसी ने तुमको परखा,
स्वार्थ व कुटिल भाव से तुमको देखा,
तुमने दिया है वह मिसाल,
जो लगी उसे बनकर कुठार।
कर देती नतमस्तक मर्दानी,
अधरों पर मुस्कान और आँखों में पानी।
रचयिता
प्रियदर्शिनी तिवारी,
प्रधानाध्यापिका,
संविलियन विद्यालय कुआंडीह,
विकास खण्ड-मंझनपुर,
जनपद-कौशाम्बी।
त्याग समर्पण और बलिदानी,
देखो कैसा मिश्रित रूप,
अधरों पर मुस्कान और आँखों में पानी।
सदियों से यह रीत चली आई,
हँसती गाती प्रीत चली आई,
खुद चाहे जितना कष्ट सहे,
निज मुख से तनिक न आह कहे।
हो तुम करुणा की वह निशानी,
अधरों पर मुस्कान और आँखों में पानी।
जब भी किसी ने तुमको परखा,
स्वार्थ व कुटिल भाव से तुमको देखा,
तुमने दिया है वह मिसाल,
जो लगी उसे बनकर कुठार।
कर देती नतमस्तक मर्दानी,
अधरों पर मुस्कान और आँखों में पानी।
रचयिता
प्रियदर्शिनी तिवारी,
प्रधानाध्यापिका,
संविलियन विद्यालय कुआंडीह,
विकास खण्ड-मंझनपुर,
जनपद-कौशाम्बी।

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