विश्व पृथ्वी दिवस

22 अप्रैल 2020 दिन बुधवार
स्वर्ण जयंती
वर्ष 2020 पृथ्वी दिवस की थीम (जलवायु कार्यवाही)

पृथ्वी दिवस के संस्थापक- जेराल्ड नेल्सन अमेरिकी राजनेता व  पर्यावरणविद

पहला संस्थापना दिवस-22 अप्रैल 1970

 उद्देश्य
 लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना। अपनी वसुंधरा को कैसे संरक्षित कर सकते हैं? इसका चिंतन मनन व कार्यवाही। जनचेतना बढ़ाना पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना पर्यावरण संरक्षण के उपायों के लिए अग्रसर करना है।
 मनाए जाने का कारण- पृथ्वी ही एकमात्र ग्रह है जिस पर जीवन है।
धरती पर जीवन को बनाए रखने के लिए पृथ्वी की प्राकृतिक संपत्ति को बनाए रखना बहुत जरूरी है। भगवान द्वारा बनाई गई सबसे बुद्धिमान कृति है इंसान। भीड़ में वह इंसान जिसे धरती ने ही जन्म दिया वह उसी का ध्यान रखना भूल गया और संसाधनों का निर्दयतापूर्वक इस्तेमाल करते हुए धरती के अस्तित्व को ही संकट में डाल दिया। बढ़ते औद्योगिकीकरण से ओजोन परत का क्षरण जो हमें सूर्य की घातक किरणों से बचाता है। उद्योगों से निकलने वाले जहरीले पदार्थों के मिलने से नदियों का सूखना पर्यावरण दूषित होने का बड़ा कारण है। जो भूमंडल के तापक्रम में तेजी से वृद्धि की ओर ले जा रहा है। बढ़ता औद्योगिकीकरण वनों की कटाई की ओर ले जा रहा है। जो पृथ्वी के तापक्रम को बढ़ाने का  कारण है। हमेशा स्वस्थ जीवन जीने के लिए पर्यावरण का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। 

बीसवीं शताब्दी के आरंभ से पृथ्वी के तापमान में बढ़ोतरी की शुरुआत हो गई। ओजोन परत में छेद होना, भयंकर तूफान, सुनामी कई प्राकृतिक आपदाएँ, ग्लोबल वार्मिंग आदि। इसी तरह धरती का दोहन जारी रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जंतु और वनस्पति का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। जीव जंतु अंधे हो जाएँगे, त्वचा झुलसने लगेगी, कैंसर रोगियों की संख्या बढ़ जाएगी, समुद्र के जलस्तर के बढ़ जाने से तटवर्ती इलाके चपेट में आ जाएँगे। 

धरती के बढ़ते संकट को रोकने और इसका संरक्षण करने हेतु जन जागरूकता अभियान के रूप में विश्व पृथ्वी दिवस जेराल्ड नेल्सन जो अमेरिकी राजनेता और पर्यावरणविद थे, उन्होंने पृथ्वी दिवस को पर्यावरण संरक्षण की नई लहर के रूप में 1970 से शुरू किया। प्रतिवर्ष 192 से अधिक देश इसे वार्षिक त्यौहार के रूप में मनाते हैं। अमेरिका में इस दिन को ट्री डे के रूप में मनाया जाता है। यह दुनिया भर का सबसे बड़ा जन जागरूकता आंदोलन है, जिसमें पृथ्वी के संरक्षण का संकल्प लिया जाता है।
पृथ्वी को बचाने के उपाय-
 अधिक से अधिक पेड़ पौधों को लगाना, वनों की कटाई को रोकना, वाहनों के इस्तेमाल को घटाना, बिजली के गैरजरूरी इस्तेमाल को घटाना, ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देना, नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ाना, प्लास्टिक का निष्पादन नहीं किया जा सकता इसलिए इसके इस्तेमाल को खत्म करना। कीटनाशकों के इस्तेमाल को घटाना। प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को रोकना, जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करना और उनका संरक्षण करना। जीव-जंतुओं पौधों की सुरक्षा करके पारिस्थितिक संतुलन को बनाए  रखना आदि।
          पृथ्वी ने हमें बहुत कुछ दिया है। यदि हम उसके उपकारों को भूल गए और यूँ ही क्रूर बने रहे। तो हम सब का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। अतः हमें पृथ्वी की विनम्रता का मान रखते हुए कृतज्ञता का भाव अपनाना होगा और जिस प्रकार पृथ्वी हमारी सेवा में निरंतर लगी रहती है, उसी तरह से हमें भी उसके प्रति सेवाभाव दिखाना होगा। जन जागरण एक आंदोलन बनाना होगा तभी पर्यावरण संरक्षित रह सकेगा और पृथ्वी पर जीवन संभव बना रहेगा अन्यथा ना होगी पृथ्वी ना ही जीवन।

लेखिका
सुमन पांडेय,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरी मनौटी,
शिक्षा क्षेत्र -खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।

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