पाठ नया सीखो तुम

पाठ नया सीखो तुम

पंछियों से सीखो तुम
कलरव का राग नया
हवाओं से सीखो तुम
संगीत का साज नया
चींटी से सीखो तुम
कर्म का कोई पाठ नया।

पाठ नया .........
पपीहे से सीखो तुम
प्रिय के लिए व्याकुलता
सूरज से सीखो तुम
निज पथ पर बढ़ना,
लिए बिना कोई आकुलता।

इन वृक्षों से सीखो तुम
देने का भाव नया
इन नदियों से सीखो तुम
चरैवेति का पाठ नया।

सोचो हममें भी क्या
कोई ऐसा गुण है
जो दे सके सभी को
सुखद सा आनंद नया
परमारथ में जिए
और परमारथ में मर जाएँ
क्या कर सकते हैं ऐसा हम
कोई आदर्श खड़ा नया।

रचयिता
संदीप कुमार,
सहायक अध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय मिठौली,
विकास खण्ड-संभल
जनपद-संभल।

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