उड़ान
कह रहे हैं उन्नत शिखर वो
चोटियों को छू लो तुम
गिर गए जो राह में वो
उम्मीद के पंख ले उड़ो
पथ बनाया हो जो तुमने
सत्मार्ग संयम से बढ़ो
भेद दो बाधाओं को जड़ से
मीत आगे बढ़ चलो
हो ना विचलित, धैर्य न खो
हो असंभव या हो दुर्लभ
अवसरों से सीख लो तुम
नए तजुर्बे लेते चलो
हो जो पथ शूलों भरा
तूफान हो या जलता धुआँ
बन मसीहा ठान लो तुम
जीत का पैगाम देते चलो
रचयिता
हिमांशी यादव,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर,
विकास खण्ड-सफीपुर,
जनपद-उन्नाव।
चोटियों को छू लो तुम
गिर गए जो राह में वो
उम्मीद के पंख ले उड़ो
पथ बनाया हो जो तुमने
सत्मार्ग संयम से बढ़ो
भेद दो बाधाओं को जड़ से
मीत आगे बढ़ चलो
हो ना विचलित, धैर्य न खो
हो असंभव या हो दुर्लभ
अवसरों से सीख लो तुम
नए तजुर्बे लेते चलो
हो जो पथ शूलों भरा
तूफान हो या जलता धुआँ
बन मसीहा ठान लो तुम
जीत का पैगाम देते चलो
रचयिता
हिमांशी यादव,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय गोपालपुर,
विकास खण्ड-सफीपुर,
जनपद-उन्नाव।

beautifully written 🤗
ReplyDeleteThanku
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