कौशल्या के लाल
नमन है कुल शिरोमणि कौशल्या के लाल।
संपूर्ण मानव जाति के लिए
बने जो मिसाल,
मर्यादा और धैर्य को
जाना जाता है नाम,
चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी को
प्रकटे श्री राम,
कुल सूर्यवंश का जगमगाया, विष्णु स्वरूप स्वयं,
दशरथ जी के घर आया,
अनुशासित जीवन जीकर दी दुनिया को मिसाल,
नमन है कुल शिरोमणि कौशल्या के लाल।
व्यवहार हो परिजनों,
या प्रजा के साथ,
सभी के साथ समदृष्टि
शील सरल बर्ताव,
संपूर्ण भारतवंश में
राजा हुआ न दूजा
जिसके कारण खुशहाल थी
अवध की सब प्रजा
तर्कसंगत वह आज भी
शील, सरल, मर्यादित
कुशल व्यवहार
नमन है कुल शिरोमणि कौशल्या के लाल।
त्याग तपस्या की
थे जो प्रतिमूर्ति
पिता की आज्ञा की खातिर
चल दिए वन की ओर
14 वर्ष तक वन में रहकर
किया राक्षसों का संहार
केवट, शबरी, अहिल्या
किया सभी का उद्धार
सीता तो मात्र बहाना थीं,
सोने की लंका श्रापमुक्त करनी थी,
नमन है कुल शिरोमणि कौशल्या के लाल।
मानवता की रक्षा हो,
या कोरो ना जैसा प्रहार,
तर्कसंगत है आज भी,
अनुशासित, संयमित,
मर्यादित व्यवहार
धैर्य त्याग शील
हैं जीवन के मूल,
सीखे हम श्रीराम से,
दिखाते हमें जो राह,
कर्तव्य परायण हम बनें,
छोड़कर अनावश्यक चाह,
नमन है कुल शिरोमणि, कौशल्या के लाल।।
रचयिता
सुमन पांडेय,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरी मनौटी,
शिक्षा क्षेत्र -खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।
संपूर्ण मानव जाति के लिए
बने जो मिसाल,
मर्यादा और धैर्य को
जाना जाता है नाम,
चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी को
प्रकटे श्री राम,
कुल सूर्यवंश का जगमगाया, विष्णु स्वरूप स्वयं,
दशरथ जी के घर आया,
अनुशासित जीवन जीकर दी दुनिया को मिसाल,
नमन है कुल शिरोमणि कौशल्या के लाल।
व्यवहार हो परिजनों,
या प्रजा के साथ,
सभी के साथ समदृष्टि
शील सरल बर्ताव,
संपूर्ण भारतवंश में
राजा हुआ न दूजा
जिसके कारण खुशहाल थी
अवध की सब प्रजा
तर्कसंगत वह आज भी
शील, सरल, मर्यादित
कुशल व्यवहार
नमन है कुल शिरोमणि कौशल्या के लाल।
त्याग तपस्या की
थे जो प्रतिमूर्ति
पिता की आज्ञा की खातिर
चल दिए वन की ओर
14 वर्ष तक वन में रहकर
किया राक्षसों का संहार
केवट, शबरी, अहिल्या
किया सभी का उद्धार
सीता तो मात्र बहाना थीं,
सोने की लंका श्रापमुक्त करनी थी,
नमन है कुल शिरोमणि कौशल्या के लाल।
मानवता की रक्षा हो,
या कोरो ना जैसा प्रहार,
तर्कसंगत है आज भी,
अनुशासित, संयमित,
मर्यादित व्यवहार
धैर्य त्याग शील
हैं जीवन के मूल,
सीखे हम श्रीराम से,
दिखाते हमें जो राह,
कर्तव्य परायण हम बनें,
छोड़कर अनावश्यक चाह,
नमन है कुल शिरोमणि, कौशल्या के लाल।।
रचयिता
सुमन पांडेय,
प्रधानाध्यापिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरी मनौटी,
शिक्षा क्षेत्र -खजुहा,
जनपद-फतेहपुर।

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