प्रार्थना

हे जगन्नियन्ता जगपालक
करता विनती तुमसे बालक,
अब करो कृपा उद्धार करो
अब करो कृपा उद्धार धरो
धरिणी माँ का प्रभु भार धरो।।

हम अज्ञानी सब बालक हैं,
तुम ज्ञान सुधा बरसा जाओ।
हर पल जीवन सुख से भर दो,
कुछ ऐसे मन हर्षा जाओ।
कर दो पावन अन्त:स्थल को
हे अखिल सृष्टि के परिचालक।
करता विनती तुमसे बालक।।

हम मानवता का त्रास हरें,
सच्चाई के बन कर पोषक।
हर एक मनुज को दें साहस
जनमानस के बनकर के तोषक।
हे ऋतुदर्शक, हे विषनाशक
करता विनती तुमसे बालक।।

हर नीति हमारी हो सुनीति,
हर एक भावना पावन हो।
हर कर्म करें मानव हित मे
और सोच सदा मनभावन हो।
हे उद्धारक, हे उद्घाटक
करता विनती तुमसे बालक।।

हे नीति नियंता निर्धारक
हे फलदायक, हे निर्णायक।
विनती करता तुमसे बालक
अब करो कृपा उद्धार करो,
अब करो कृपा संताप हरो,
धरिणी माँ का प्रभु भार धरो।।

रचयिता
रघुनाथ द्विवेदी,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय चायल, 
विकास खण्ड-चायल,
जनपद-कौशाम्बी।

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