राम फिर से आ जाओ
आई फिर शुभ घड़ी राम फिर से आ जाओ,
मानव बने दानव राम फिर से आ जाओ।
धर्म के रक्षक धर्म की आड़ में भक्षण करते,
कितने ही निर्दोष यहाँ बेमौत ही मरते।
नारी का सम्मान ना घर आँगन में बचता,
हर राह खड़ा अपना बन कोई प्रपंच है रचता।
कालख तुझ पर लगी त्याग तेरा नज़र ना भायो,
साधो तीर कमान राम फिर से आ जाओ।
धरती करे पुकार पाप का भार है भारी,
तेरी पुण्य धरा पे शब्द क्यों हो गए खारी?
हे रघुनंदन! सुनो पीर कुछ भार हटाओ,
मैली गंगा हुई राम फिर से आ जाओ।
निर्दोष भोग रहे दण्ड न्याय अन्याय हो रहा,
न्याय तुला में धरा न्याय साधन में तुल रहा।
हे पुरुषोत्तम राम! प्रजा का कष्ट मिटाओ,
धीरज बने अधीर राम फिर से आ जाओ।
भंडार दिए जो दान आज दाने को तरसें,
वन उपवन सब जीव नीर एक बूँद को तरसें।
ताल तलैया वृक्ष जीव सब राह में आओ,
हे मर्यादा पुरुष! राम फिर से आ जाओ।
रावण का है वास लोभ और लालच मन में,
वैदेही की लाज है व्याकुल नारी तन में।
हर मोड़ खड़े बहशी नारी दामन भी बचाओ,
हे विष्णु के अवतार! राम फिर से आ जाओ।
रचयिता
नवीन कुमार,
सहायक अध्यापक,
माडल विद्यालय कलाई,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।
मानव बने दानव राम फिर से आ जाओ।
धर्म के रक्षक धर्म की आड़ में भक्षण करते,
कितने ही निर्दोष यहाँ बेमौत ही मरते।
नारी का सम्मान ना घर आँगन में बचता,
हर राह खड़ा अपना बन कोई प्रपंच है रचता।
कालख तुझ पर लगी त्याग तेरा नज़र ना भायो,
साधो तीर कमान राम फिर से आ जाओ।
धरती करे पुकार पाप का भार है भारी,
तेरी पुण्य धरा पे शब्द क्यों हो गए खारी?
हे रघुनंदन! सुनो पीर कुछ भार हटाओ,
मैली गंगा हुई राम फिर से आ जाओ।
निर्दोष भोग रहे दण्ड न्याय अन्याय हो रहा,
न्याय तुला में धरा न्याय साधन में तुल रहा।
हे पुरुषोत्तम राम! प्रजा का कष्ट मिटाओ,
धीरज बने अधीर राम फिर से आ जाओ।
भंडार दिए जो दान आज दाने को तरसें,
वन उपवन सब जीव नीर एक बूँद को तरसें।
ताल तलैया वृक्ष जीव सब राह में आओ,
हे मर्यादा पुरुष! राम फिर से आ जाओ।
रावण का है वास लोभ और लालच मन में,
वैदेही की लाज है व्याकुल नारी तन में।
हर मोड़ खड़े बहशी नारी दामन भी बचाओ,
हे विष्णु के अवतार! राम फिर से आ जाओ।
रचयिता
नवीन कुमार,
सहायक अध्यापक,
माडल विद्यालय कलाई,
विकास खण्ड-धनीपुर,
जनपद-अलीगढ़।

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