काली सुंदरता

माना कि हम 'काले' हैं,
फिर भी तो रौनक वाले हैं।
यह रंग बहुत ही पक्का है,
फिर भी क्यों इतने ताले हैं।

आँखों में काजल 'काले' हैं,
माले के मोती 'काले' हैं।
हर रंग का ये रखवाला है,
नज़रों के टीके 'काले' हैं।

किताब के अक्षर 'काले' हैं,
तारों के बिस्तर 'काले' हैं।
आँखें मूँद के देखो जो,
सपनों के रंग भी 'काले' हैं।

सुंदर कान्हा भी 'काले' हैं,
सुंदर नयना भी 'काले' हैं।
सुंदरता का कोई रंग नहीं,
ख़ुद के साये भी 'काले' हैं।

माना कि हम 'काले' हैं,
फिर भी तो रौनक वाले हैं।

रचयिता
दीक्षा मिश्रा,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय असनी द्वितीय,
विकास खण्ड-भिटौरा,
जनपद-फतेहपुर।

Comments

Post a Comment

Total Pageviews