ममत्व से परिपूर्ण माँ धरती

माँ शब्द को सार्थक करती।
ममत्व से परिपूर्ण माँ धरती।
पाप, अधर्म, भ्रष्टाचार सब सहती।
मूक बधिर बन कुछ न कहती।
सम्पूर्ण जगत का भार उठाये।
अन्न, जल, खनिजरूपी स्वर्ण
खजाना अपने उर में समाये।
निःस्वार्थ भाव से हम सब पर
अपना सर्वस्व लुटाती जाए।
पादप, पुष्प, फल और लताएँ
भू का श्रृंगार पुष्प रूपी मालाएँ।
श्रृंगार से मत कर वंचित धरा को।
स्वार्थ के वशीभूतों न लूटो माँ को।
माँ पर करना बंद सितम कर।
स्वयं ही पैरों पर मार कुल्हाड़ी
परिस्थितियों को न और विषम कर।
पृथ्वी दिवस के विशेष अवसर पर
एक सच्चा वादा कर जाए।
रोपित करें वट वृक्ष लताएँ
पर्यावरण को स्वच्छ बनाये।
गंदगी, प्रदूषण को न फैलाये।
अन्न, जल, प्राकृतिक संसाधन
सीमित ही उपयोग में लाये।
मत करो हिय पर माँ के बैठ प्रहार।
बंद करो पाप, अधर्म और भ्रष्टाचार।
अपनाओ नैतिक आचार-व्यवहार।
धरा के हम पर बहुत उपकार।
इससे ही जीवन संभव साकार।
कर लो इस माँ से भी प्यार।
कर लो इस माँ से भी प्यार।।

रचयिता
रीनू पाल,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय दिलावलपुर,
विकास खण्ड - देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

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