मेरा देश

मुझको मेरा देश पसन्द है,
इसकी हर एक बात पसन्द है।

इसकी मिट्टी की सोंधी खुशबू,
इसके लहलहाते खेत पसन्द हैं।

अनेक हैं भाषाएँ, अनेक हैं लोग,
पर हर एक की एक नई है सोच।

हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई,
यहाँ सभी हैं भाई-भाई।

संस्कृति, खान-पान सभी के हैं भिन्न,
पर सबमें मिलते हैं एकता के चिन्ह।

जब भी आती देश पर बात,
मिलकर हो जाते सब एक।

भारत देश है वीरों की खान,
जिनकी गाथा सुन भरता रोमांच।

हमने देखी सारी दुनिया,
पर कोई नहीं है भारत जैसा।

मेरा देश है बड़ा महान्,
भारत है गुणों की खान।

मुझको मेरा देश पसन्द है,
इसकी हर एक बात पसन्द है।

रचयिता
डॉ0 रचना सिंह, 
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय कटरी पीपरखेड़ा,
विकास खण्ड-सिकन्दरपुर कर्ण, 
जनपद-उन्नाव।

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