बच्चों का सर्वांगीण विकास
प्राथमिक शिक्षा में सबसे
महत्वपूर्ण योगदान एक शिक्षक
का होता है। एक शिक्षिका
के रूप में प्राथमिकता के आधार पर मैं अपने लक्ष्य
क्रमानुसार इंगित करती हूँ।
1) शतप्रतिशत
नामांकन
सर्वप्रथम
मेरा लक्ष्य यह रहता
है कि गाँव से समस्त 6 से 14 वर्ष तक के बालक-
बालिकाओं का नामांकन
सरकारी विद्यालय मे करा सकूँ। इसके
लिए मैं ग्रामवासियों से अपने विद्यालय की विशेषताओं को साझा करती हूँ। जिससे वे प्रेरित होकर अपने बच्चों
का नामांकन हमारे विद्यालय में कराने का लिए
तैयार हो जाते हैं।
2) नामांकन
के सापेक्ष उपस्थिति
विद्यालय
में नामांकन कराना ही
मेरा उद्देश्य नहीं होता है अपितु जितने बच्चे विद्यालय मे
नामांकित हैं उन्हें प्रतिदिन विद्यालय लाने की जिम्मेदारी
भी मैं निभाती हूँ। इसके लिए मैंने एक नवाचार
किया है। प्रत्येक कक्षा में ग्रुप
लीडर बनाये
गये हैं। जो प्रतिदिन अपने
मुहल्ले के बच्चों को
विद्यालय लाते
हैं। यदि कोई बच्चा किसी कारण से विद्यालय
नहीं आता है तो उसके
विषय मे सूचना भी उन्हीं ग्रुप लीडर के माध्यम
से प्राप्त हो जाती है।
3) गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
मेरा
तीसरा लक्ष्य विद्यालय मे
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है। मेरा यह
मानना है कि जिन बच्चों को अभिभावक हमारे सुपुर्द
करते हैं। हमारा यह
परम कर्तव्य है कि हम उन
बच्चो को अच्छी प्रकार शिक्षा दें। हमें
उस जगह अपने बच्चे
को रख लेना चाहिए । यदि
आप अच्छी तरह से शिक्षा
देते हैं तो विद्यालय
मे नामांकन की कोई कमी नहीं रहती है। यह मेरा अनुभव
है।
मै
ऐसा मानती हूँ कि
किसी भी छात्र के
लिए भाषा का ज्ञान
सर्वोपरि है। यदि छात्र हिन्दी
पढ़ना और लिखना सीख जाता
है तो सभी विषय की
शिक्षा प्राप्त करने मे उसे कोई कठिनाई नहीं हो सकती
है। गणितीय दक्षताओं को विकसित करना
भी हमारा उद्देश्य रहता है।
4) अनुशासन का पालन
मेरा
चौथा लक्ष्य अनुशासन का कठोरता से पालन करना है क्योंकि
यदि आप अनुशासित नहीं रहेंगे तो आप कोई भी
कार्य ठीक तरह से सम्पादित
नहीं कर सकते और न अपने विद्यालय
के सहयोगियों को भी अनुशासित रख सकते हैं।
5) सामुदायिक
सहभागिता
विद्यालय
के विकास में समुदाय का बहुत बड़ा योगदान
रहता है। मेरा यह प्रयास रहता है कि अपने
विद्यालय के विकास के लिए
मैं समुदाय का किस प्रकार सहयोग ले सकती हूँ और
मैने सहयोग प्राप्त भी
किया है। मेरे विद्यालय मे फर्नीचर, शौचालय, झूले और भी विभिन्न
प्रकार का सहयोग समुदाय
के द्वारा प्राप्त हुआ
है। यदि आप पूर्ण मनोयोग से
शिक्षण कार्य करते हैं तो समाज भी आपका भरपूर
सहयोग करने के लिए अग्रसर रहता
है।
6) बच्चों
का सर्वांगीण विकास
हमारे विद्यालय के छात्र-छात्राओ
का सर्वांगीण करना
ही मेरा सदा से ही
उद्देश्य रहा है। जब बच्चे का सर्वांगीण विकास होगा, तभी वह एक कामयाब नागरिक बन
सकता है। इसके लिए विद्यालय मे अनेक प्रकार की गतिविधियाँ जैसे-योग, कला, खेलकूद,
संगीत आदि की शिक्षा दी
जाती है। जो बच्चों के लिए
अत्यंत उपयोगी साबित होते हैं।
इन
सभी उद्देश्यों के लिए मै पूर्ण निष्ठा से कार्य करती हुई
अपने पथ
पर सदा अग्रसर होती
रहती हूँ।
लेखिका
डॉ0 सुमन
गुप्ता,
प्रधानाध्यापक,
प्राथमिक
विद्यालय कोट,
विकास खण्ड-बड़ागाँव,
जनपद-झाँसी।

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