बच्चे और बाबा

लिए लुकाटी हाथ में,
छोटी धोती पाँव में।

           गांधी बाबा आते हैं,
           जल्दी कदम बढ़ाते हैं।

चश्मा पहने आँख में,
चरखा काते हाथ से।

          गांधी बाबा आते हैं,
          जल्दी कदम बढ़ाते हैं।

वे बच्चों के बापू थे,
बच्चों को समझाते थे।

         अपना काम आप करो,
         नाली सड़कें साफ करो।

गांधी बाबा आते हैं,
जल्दी कदम बढ़ाते है।

        बड़े सबेरे उठते थे,
        मंजन कुल्ला करते थे।

नहाकर मंदिर जाते थे,
मीठा गाना गाते थे।

       रघुपति राघव राजाराम
       पतित पावन सीताराम।

रचयिता
राधा त्रिपाठी,
सहायक अध्यापक,
उच्च प्राथमिक विद्यालय सनगांव,
विकास खण्ड - हसवा,
जनपद - फतेहपुर।

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