बुरे वक्त की मार में
बुरे वक्त की मार में,
हृदय की करुण पुकार में,
धीर तुम न विचलित हो,
क्योंकि हृदय तेरा उदार है।
दुख के बादल जब आ जाएँ,
घनघोर अंधेरा छा जाए,
धीर तुम ना धैर्य खोना,
क्योंकि होती तुम्हारी जय जयकार है।
समय की इस कठिन परीक्षा में,
दुख, भय, विषाद और निराशा में,
धीर तुम यह विश्वास रखना,
कि यह जीवन का आता जाता कारोबार है।
जिंदगी के इस उतार-चढ़ाव में,
जंग उसी ने जीता है, जिसने हिम्मत हारी नहीं,
चुनौतियों का सामना कर, विष का प्याला पीता है।
रख ध्यान हमेशा एक बात तू,
निरपेक्ष भाव से कर्म कर,
विश्वास सदा उस दयानिधि पर,
जिसने दिया यह जीवन तुझको,
धीर तुम न हिम्मत हारना,
होगी विजय तेरी अवश्य एक दिन,
क्योंकि बड़ा दयालु वह पालनहार है।
रचयिता
प्रियदर्शिनी तिवारी,
प्रधानाध्यापिका,
संविलियन विद्यालय कुआंडीह,
विकास खण्ड-मंझनपुर,
जनपद-कौशाम्बी।
हृदय की करुण पुकार में,
धीर तुम न विचलित हो,
क्योंकि हृदय तेरा उदार है।
दुख के बादल जब आ जाएँ,
घनघोर अंधेरा छा जाए,
धीर तुम ना धैर्य खोना,
क्योंकि होती तुम्हारी जय जयकार है।
समय की इस कठिन परीक्षा में,
दुख, भय, विषाद और निराशा में,
धीर तुम यह विश्वास रखना,
कि यह जीवन का आता जाता कारोबार है।
जिंदगी के इस उतार-चढ़ाव में,
जंग उसी ने जीता है, जिसने हिम्मत हारी नहीं,
चुनौतियों का सामना कर, विष का प्याला पीता है।
रख ध्यान हमेशा एक बात तू,
निरपेक्ष भाव से कर्म कर,
विश्वास सदा उस दयानिधि पर,
जिसने दिया यह जीवन तुझको,
धीर तुम न हिम्मत हारना,
होगी विजय तेरी अवश्य एक दिन,
क्योंकि बड़ा दयालु वह पालनहार है।
रचयिता
प्रियदर्शिनी तिवारी,
प्रधानाध्यापिका,
संविलियन विद्यालय कुआंडीह,
विकास खण्ड-मंझनपुर,
जनपद-कौशाम्बी।

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