मेरा बस्ता

कब होगा स्कूल का रस्ता
सोच रहा है मेरा बस्ता,
नन्हें से काँधों पे टिकता
धीरे-धीरे हिलता डुलता।

        पहला वादन है जब आता
          धीरे-धीरे फिर मुस्काता,
         किताबें उससे बाहर आती
      फिर नन्ही उँगली उसमें फिर जाती।

नहीं ठिकाना उसकी खुशी का
वाचन करता ऊँची बाँसुरी सा,
मन्द-मन्द मुस्काता फिर वह बस्ता
फिर इठलाता ज़ोर से हँसता।

      निर्भय उसकी किताबें बोले
         मन के पन्ने-पन्ने खोले,
      अब उसको है साहस आये
      बस्ता बोला, जल्दी कल आये।

पड़ा रह गया घर के कोने में
रोज़ घूमता था, स्कूल होने में,
गहन सोच मे पड़ गया बस्ता
हँसने लगा अपने आप रफ्ता-रफ्ता।

रचयिता
फरहत तबस्सुम,
राजकीय प्राथमिक विद्यालय कालिका,
विकास खण्ड-धारचूला,
जनपद-पिथौरागढ़,
उत्तराखण्ड।

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