नमन जलियांवाला बाग को
नमन आज उन मासूमों को
देश पर जिसने लहू बहाया,
नमन आज उन निर्दोषों को,
गोलियाँ जिन्होंने सीने पर खाया।
नमन आज उस पंजाब की मिट्टी को
जिसने ऐसे वीरों को उपजाया,
नमन आज अमृतसर की धरती को
अपने औलादों को जिसने फौलाद बनाया।
नमन आज उस भारत माँ को
ऐसे वीरों को जिसने दूध पिलाया,
नमन आज उस कौम को जिसने
अत्याचारों को हँसकर गले लगाया।
नमन आज उन देशभक्तों को
अंग्रेजी गोलियों को सीने पर खाया,
नमन आज बाग-ए-जलियांवाला को
क्रांति का जिसने अलख जगाया।।
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।
देश पर जिसने लहू बहाया,
नमन आज उन निर्दोषों को,
गोलियाँ जिन्होंने सीने पर खाया।
नमन आज उस पंजाब की मिट्टी को
जिसने ऐसे वीरों को उपजाया,
नमन आज अमृतसर की धरती को
अपने औलादों को जिसने फौलाद बनाया।
नमन आज उस भारत माँ को
ऐसे वीरों को जिसने दूध पिलाया,
नमन आज उस कौम को जिसने
अत्याचारों को हँसकर गले लगाया।
नमन आज उन देशभक्तों को
अंग्रेजी गोलियों को सीने पर खाया,
नमन आज बाग-ए-जलियांवाला को
क्रांति का जिसने अलख जगाया।।
रचयिता
अंजली मिश्रा,
सहायक शिक्षिका,
प्राथमिक विद्यालय टिकरा,
विकास खण्ड-देवमई,
जनपद-फतेहपुर।

Bht sunder,marmsparshi kavita hai...
ReplyDeleteHm sbko aaj ka din anyay k virudh awaj uthane hetu samarpit Krna chahiye..
सुंदर कविता 👌 🙏
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