हम सब एक हैं
कोई अमीर हो भले,
कोई गरीब हो भले।
संसार के ये दिन रात,
सब के लिए एक हैं।
कोई श्याम रंग का,
कोई गोर रंग का।
दिल में आत्मा बसी,
सभी की वो एक हैं।
कोई हिन्दू जाति का,
कोई सिक्ख जाति का।
दिन रात वो नाम ले,
वो परमात्मा भी एक है।
तन से भी हो अलग,
मन से भी हो अलग।
मनुष्यता की रचना का,
विकास तो एक है।
कोई उच्च जाति का,
कोई निम्न जाति का।
रगों में खून है सभी के,
वो लाल रंग एक है।
चाह भी हो अलग,
राह भी हो अलग।
अन्त में सभी की,
मंजिलें तो एक हैं। ```
रचयिता
प्रकाश बड़वाल,
सहायक अध्यापक,
राoप्राoविo मुसाढ़ुंग,
विकास खण्ड-जखोली,
जनपद-रुद्रप्रयाग,
उत्तराखण्ड।
कोई गरीब हो भले।
संसार के ये दिन रात,
सब के लिए एक हैं।
कोई श्याम रंग का,
कोई गोर रंग का।
दिल में आत्मा बसी,
सभी की वो एक हैं।
कोई हिन्दू जाति का,
कोई सिक्ख जाति का।
दिन रात वो नाम ले,
वो परमात्मा भी एक है।
तन से भी हो अलग,
मन से भी हो अलग।
मनुष्यता की रचना का,
विकास तो एक है।
कोई उच्च जाति का,
कोई निम्न जाति का।
रगों में खून है सभी के,
वो लाल रंग एक है।
चाह भी हो अलग,
राह भी हो अलग।
अन्त में सभी की,
मंजिलें तो एक हैं। ```
रचयिता
प्रकाश बड़वाल,
सहायक अध्यापक,
राoप्राoविo मुसाढ़ुंग,
विकास खण्ड-जखोली,
जनपद-रुद्रप्रयाग,
उत्तराखण्ड।

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