समुद्र मंथन
आसान नहीं सागर बन पाना
जो खुद तप कर मौन रह पाते।
समा लेते खारापन सागर सा
विश्व पटल को शीतल रख पाते।
सागर नमन तुम्हारे धैर्य को
कहाँ से इतनी सहनशक्ति पाते।
समाकर रखते विशाल जलराशि
वैश्विक तापमान क्षीण कर पाते।
कितना भण्डारण जैव विविधता
जीवन उत्पति आधार हम पाते।
खारापन भी है वरदान तुम्हारा
गर्म ठंडे प्रदेश का संतुलन पाते।
हम ईंधन जला प्रदूषण फैलाते
तुम कार्बन अवशोषित कर पाते।
जज्ब कर प्रचण्ड ऊष्मा सूर्य की
हम मौसम को खुशनुमा हैं पाते।
तुम हो सागर तो है नदिया पानी
तुम से सभ्यता संस्कृति हैं पाते।
तुम से मिलते हैं पोखर झीलें
तुम्हारे कारण मीठा पानी पाते।
चेतावनी देते हो देख कूड़ा कचरा
सुनामी समुद्री चक्रवात बढा़ जाते।
प्रवाल भित्तियाँ और मछलियाँ
जलीय जीव तुमसे जीवन पाते।
अनगिनत खनिज लवण ईंधन
भू तापीय भण्डार तुझसे पाते
तेरे सम्मान मे पाँच अप्रैल को
हम सब समुद्र दिवस मनाते।
इस दिन उन्नीस सौ चौंसठ से
समुद्र जल पर स्टीम चला पाते।
तब मुम्बई से लन्दन की यात्रा की
आज पूरा विश्व भ्रमण कर पाते।
रचयिता
प्रेमलता सजवाण,
सहायक अध्यापक,
रा.पू.मा.वि.झुटाया,
विकास खण्ड-कालसी,
जनपद-देहरादून,
उत्तराखण्ड।
जो खुद तप कर मौन रह पाते।
समा लेते खारापन सागर सा
विश्व पटल को शीतल रख पाते।
सागर नमन तुम्हारे धैर्य को
कहाँ से इतनी सहनशक्ति पाते।
समाकर रखते विशाल जलराशि
वैश्विक तापमान क्षीण कर पाते।
कितना भण्डारण जैव विविधता
जीवन उत्पति आधार हम पाते।
खारापन भी है वरदान तुम्हारा
गर्म ठंडे प्रदेश का संतुलन पाते।
हम ईंधन जला प्रदूषण फैलाते
तुम कार्बन अवशोषित कर पाते।
जज्ब कर प्रचण्ड ऊष्मा सूर्य की
हम मौसम को खुशनुमा हैं पाते।
तुम हो सागर तो है नदिया पानी
तुम से सभ्यता संस्कृति हैं पाते।
तुम से मिलते हैं पोखर झीलें
तुम्हारे कारण मीठा पानी पाते।
चेतावनी देते हो देख कूड़ा कचरा
सुनामी समुद्री चक्रवात बढा़ जाते।
प्रवाल भित्तियाँ और मछलियाँ
जलीय जीव तुमसे जीवन पाते।
अनगिनत खनिज लवण ईंधन
भू तापीय भण्डार तुझसे पाते
तेरे सम्मान मे पाँच अप्रैल को
हम सब समुद्र दिवस मनाते।
इस दिन उन्नीस सौ चौंसठ से
समुद्र जल पर स्टीम चला पाते।
तब मुम्बई से लन्दन की यात्रा की
आज पूरा विश्व भ्रमण कर पाते।
रचयिता
प्रेमलता सजवाण,
सहायक अध्यापक,
रा.पू.मा.वि.झुटाया,
विकास खण्ड-कालसी,
जनपद-देहरादून,
उत्तराखण्ड।

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