नारी तेरे रूप अनेक

नारी तेरा रूप अनेक, तू भाँति-भाँति में भाती हो।
बेटी कभी, कभी बहन, कभी माँ का रूप दिखाती हो।।

तू पुरुषों की पूरक सत्ता
          तू पुरुषों की ताकत हो
तू ममता की सच्ची मूरत
          तू ही एक इबादत हो
तू शीतलता छाँव लिये, पीड़ा सदा मिटाती हो।
नारी तेरा रूप अनेक, तू भाँति-भाँति में भाती हो।।

ना कोमल, ना अबला तुम
     अनुसुइया जैसी दृढ़ हो
मंत्री, दासी, संगिनी सदृश
        लक्ष्मी, दुर्गा सुदृढ़ हो
हजरत महल, टेरेसा बन जग को शांति सिखाती हो।
नारी तेरा रूप अनेक तू भाँति-भाँति में भाती हो।।

स्नेह और सौजन्य की देवी
       जीवनदात्री पावन अंक
तू समाज का धारण-पोषण
       तू ज्योति, तू ही मयंक
तू संघर्षो की गाथा, तू दीया और तू बाती हो।
नारी तेरा रूप अनेक तू भाँति-भाँति में भाती हो।।

तू संस्कार-आधारशिला
       तू समाज का दर्पण हो।
तू गुनगुन कलरव की विला
      तू सुख-आनन्द-समर्पण हो।।
अभिशापों को स्वयं झेल, चट्टानों से टकराती हो।
नारी तेरा रूप अनेक, तू भाँति- भाँति में भाती हो।।

तू सीता की क्षमा-धैर्य
      और द्रौपदी का विश्वास
सावित्री फूले की शिक्षा
     रजिया, कल्पना की मधुर आस।।
कलम थाम तू नेक राह की सच्चाई दिखलाती हो।
नारी तेरा रूप अनेक तू भाँति-भाँति में भाती हो।।

तू राधा, तू ही कौशल्या,
        तू सरोजनी, झलकारी हो।
तू पार्वती, तू  अहिल्या है
       तू शक्ति की अवतारी हो।
तू आन-बान सम्मान खातिर लक्ष्मी बाई बन जाती हो।
नारी तेरा रूप अनेक तू भाँति- भाँति में भाती हो।।

चूल्हा-चौका जिम्मेदारी
     घर-आँगन की शहनाई हो।
इज्जत सबकी ढकी रहे
      करती रहती तुरपाई हो।।
पर्दे के पीछे रहकर भी खुद आकाश उठाती हो।
नारी तेरा रूप अनेक तू भाँति-भाँति में भाती हो।।

तेरे बिन खुशी असम्भव
       तू सम्मान के लायक हो
हर क्षेत्र में तेरा योगदान
     सफलता की परिचायक हो।
नारी सबको अरुण नमन जो प्रेम सुधा बरसाती हो।
नारी तेरा रूप अनेक तू भाँति-भाँति में भाती हो।।

रचनाकार
अरुण कुमार यादव,
उच्च प्राथमिक विद्यालय बरसठी,,
विकास क्षेत्र-बरसठी,
जनपद-जौनपुर।
Mob--9598444853

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