आज का माहौल

आज के इस माहौल में डरा और सहमा हर इंसान है।
अपने और अपनों की चिंता में परेशान हर इंसान है।
क्या खाएँ, क्या करें, कैसे रहें, कैसे जिएँ
बस यही सब सोचकर खौफ में हर इंसान है।
आज के इस माहौल में डरा और सहमा हर इंसान है।
बेबस जिंदगी बन गयी है, पिंजड़े में आज कैद इंसान है।
कभी जिंदगी की रफ़्तार बहुत तेज होती थी।
आज जिंदगी की रफ्तार घरों में लाचार है।
आज के इस माहौल में डरा और सहमा हर इंसान है।
कोरोना के कहर ने इंसान की जिंदगी के सभी सुख चैन छीन लिये हैं।
न खाने की फिक्र है, न आँखों में नींद है, न घूमने की फिक्र है,
न घर से बाहर निकलने की जल्दी है।
जिंदगी को कैसे महफूज रखा जाए बस यही एक फिक्र है।
आज के इस माहौल में डरा और सहमा हर इंसान है।
मन में एक विश्वास है, सकारात्मक दृष्टिकोण है साफ-सफाई और सामाजिक दूरी से जल्द ही खत्म होने वाला है कोरोना का अत्याचार है।
जल्द ही खत्म होने वाला कोरोना का अत्याचार है।

रचयिता
अजय कुमार श्रीवास्तव,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय टेवाँ प्रथम,
विकास खण्ड-मंझनपुर, 
जनपद-कौशाम्बी।।

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