डॉ0 भीमराव रामजी अंबेडकर
14 अप्रैल 1891को महू, (मध्यप्रदेश) में जन्मे डॉ0 भीमराव रामजी अम्बेडकर को बचपन से ही आर्थिक और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। बाबा साहब ने विषम परिस्थितियों में पढ़ाई की शुरुआत की। उन्हें स्कूल में काफी भेदभाव झेलना पड़ा था। विषम परिस्थितियों सामाजिक संघर्ष से जूझते हुए वे आजीवन दलित समाज के उत्थान के लिए कार्य करते रहे। बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर का जीवन संघर्ष और सफलता की अद्भुत मिसाल है, जो समस्त विश्व में शायद ही कहीं और देखने को मिले। उनकी 129 वीं जयंती के अवसर पर प्रस्तुत हैं उनके कुछ अनमोल विचार..
1-जीवन लंबा होने के बजाए महान होना चाहिए।
2-अपने भाग्य के बजाय अपनी मजबूती पर विश्वास करो।
3-जो व्यक्ति अपनी मौत को हमेशा याद रखता है वह सदा अच्छे कार्य में लगा रहता है।
4-बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।
5-समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।
6-यदि मुझे लगा कि संविधान का दुरुपयोग किया जा रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊँगा।
7- मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।
8-जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके लिए बेईमानी है।
8- इतिहास बताता है कि जहाँ नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है।
राजकुमार शर्मा,
प्रधानाध्यापक,
पूर्व माध्यमिक विद्यालय चित्रवार,
विकास खण्ड-मऊ,
जनपद-चित्रकूट।

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