सावित्री बाई फूले

काँटों भरी राह पर जिसने, कदम बढ़ाया ‌था पहला।

की न थी समाज की कोई  चिंता, अपमानों का था साया।

हिम्मत से  शिक्षा हासिल कर, कीर्तिमान हैं दे डाले।

नारी को सशक्त जीवन दे, अवसर शिक्षा का पाया।


पीढ़ी दर पीढ़ी ‌शिक्षा का, नित नूतन विस्तार किया।

प्रथम शिक्षिका बनकर, शिक्षा का‌ अधिकार दिया।

विद्यालय की नींव रखी, हर बिंब तोड़ कर नये गढे़।

शत-शत नमन मात तुम्हें, अवसर हमें प्रदान किया।


आज और कल की परिभाषा के, अन्तर ही धो डाले।

ज्योतिबा फूले सरीखे युग ने, शिक्षा के अवसर‌ खोले।

धन्य सावित्री बाई फूले को, धन्य-धन्य पितु-माई को।

शिक्षा संग स्वरोजगार भी, मिलकर सब  जय बोले।।


रचयिता

रीता गुप्ता,

सहायक अध्यापक,

पूर्व माध्यमिक विद्यालय कलेक्टर पुरवा,
विकास खण्ड-महुआ,
जनपद-बाँदा।





Comments

Total Pageviews