02/2026, बाल कहानी- 17 जनवरी

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 02/2026
*17 जनवरी 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #दीदी
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सुबह जल्दी उठकर उसने झाड़ू बुहारु की और नल से पानी खींचकर जल्दी_जल्दी नहा लिया। कहीं देर न हो जाए, ये ख्याल उसके मन में निरन्तर बना हुआ था।
सूर्य को अर्घ्य देकर उसने चूल्हा सुलगा दिया। ईंधन उसने रात को ही चूल्हे के पास रख दिया था।
जल्दी से रात को ही काटी हुई सब्जी को छोंककर आटा गूँथने लगी।
उसके हाथों से भी ज्यादा तेजी से उसके मस्तिष्क में विचार चल रहे थे। पास ही बरोसी में उसने पानी गर्म करने को रखा हुआ था। अब उसने सोनू को आवाज दी, "सोनू भैया! उठ जा जल्दी से.. स्कूल को देर हो रही है, सोनू! ओ सोनू! उठ जा रे।"
सोनू नहीं उठा, वह आवाज लगाती रही। इधर जल्दी-जल्दी खाना भी बना रही थी।
आखिरी पराठां सेंककर वह हाथ धो-पोंछकर बिस्तर के पास गयी और प्यार से सोनू को उठाया, "सोनू भैया! उठ जा।" 
थोड़ी ना-नुकुर के बाद सोनू उठ गया और गर्म पानी से नहाकर तैयार हो गया। इसी बीच वह सोनू के लिए गर्म दूध और परांठा ले आयी।
जिसे सोनू ने चुपचाप खा लिया।
बिन माँ के बच्चे शायद जिद करना भूल जाते हैं।
"दीदी! आज शाम को मुझे जूते दिलवा लाना। अब ठण्ड बहुत बढ़ गई है। मैडम भी रोज ही टोकती हैं।"
"ठीक है सोनू! आज चलेंगे।" पापा ने पैसे कल ही भेज दिए थे।"
अब वह दोनों फुर्ती से स्कूल के लिए निकल लिए। सोनू का बैग कन्धे पर लादकर और उसक हाथ पकड़कर सीमा सड़क तक आयी।
सड़क के उस पार स्कूल था।
रोडक्रॉस करना आसान नहीं था लगातार दौड़ते वाहनों के बीच सही समय पर हाथ का इशारा कर गाड़ियों को रुकवाते हुए वह स्कूल की तरफ पहुँचे।
सोनू दीदी की तरफ हाथ हिलाता हुआ स्कूल में घुस गया और वह बाहर तब तक खड़ी रही, जब तक कि सोनू क्लास में घुसकर आँखों से ओझल नहीं हो गया।

संस्कार सन्देश - 
जिम्मेदारी व्यक्ति को समय से पूर्व बड़ा बना देती है।

कहानीकार - 
#पूनम_सारस्वत 'प्रज्ञा') स०अ) एकीकृत विद्यालय रुपानगला, खैर, अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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