03/2026, बाल कहानी- 19 जनवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 03/2026
*19 जनवरी 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी- #स्मृति
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सौम्या अपने नाम की ही तरह गुणवती, कोमल है। सौम्या की उम्र होगी लगभग पैंतीस से अड़तीस वर्ष के बीचमें। गुणवती होते हुए भी उसके विवाह में अड़चन बन रहा था उसका रंग, क्योंकि वह थोड़ी साँवली थी। उसका यही साँवला रंग उसके हर गुण पर हावी हो रहा था। सौम्या के पिता हार-थककर बहुत थक चुके थे। वह मायूस होकर भाग्य के भरोसे बैठ जाते थे।
आखिर तीन साल बाद वह दिन आता है। आज उसकी शादी है। मन में हजारों सपने लिये दुल्हन के वेश में सौम्या बहुत खुश थी। सभी लोग बारात का इन्तजार कर रहें थे। तभी बच्चे भागते हुए आते हैं और कहते हैं, "बारात आ गयी।" सभी लड़कियाँ दूल्हे और बारात को देखने के लिए बाहर आ जाती हैं। दूल्हा बग्गी से जैसे ही उतरता है, सब लड़कियाँ उसको देखकर मन्त्र-मुग्ध हो जाती हैं। सबकी जुबान पर एक ही शब्द है, "हाय! कितना सुन्दर दूल्हा है।"
बारात का स्वागत किया जाता है। जयमाला व फेरों का वक्त आ जाता है। मण्डप सजा हुआ है लेकिन सौम्या अपनी अलग ही दुनिया में है। वह उसके ख्यालों में खोई हुई है। वह पहली बार अनुपम से मिली थी। वह अपने नाम के जैसा सुन्दर और सुशील है अनुपम। वह कालेज में घुसती ही है कि तभी उसे सभी लोग "ओ काली!, ओ काली!" कहकर चिढ़ाने लग जाते हैं!
एक लड़का तो उसके ऊपर इंक फेंक देता है। उसके सारे कपड़े गन्दे हो जाते हैं। सौम्या चुपचाप सब सुनती-सहती रहती है और रोने लग जाती है। तभी वहाँ अनुपम आता है जो कि उस जिले का डी० एम० है और वेश बदलकर कालेज का निरीक्षण करने आया है, क्योंकि उस कालेज से किसी ने रैगिंग की शिकायत की थी। वह चीखकर सबको डाँटता है, "शर्म आनी चाहिए तुम लोगों को। ऐसे किसी की शारीरिक बनावट या रंग-रूप का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।" वह पुलिस स्टेशन काॅल लगाने को होता है कि तभी सौम्या उसको रोक लेती है और कहती है, "प्लीज माफ कर दीजिए! इन लोगों को इनका कैरियर खराब हो जायेगा। आगे से ये लोग ऐसा नहीं करेंगे।"
वह हाथ पकड़कर उसे अन्दर ले जाती है। अनुपम उसके सरल व्यवहार पर आकर्षित हो जाता है। वह उसके माता-पिता के सामने विवाह का प्रस्ताव रखता है और सौम्या के माता-पिता मान जाते हैं। सौम्या सपनों की दुनिया में खोई हुई है कि तभी पण्डित जी आवाज लगाते हैं। दुल्हन को बुलाया जाये और सौम्या अपने ख्यालों से बाहर आती है। विधिवत दोनों का विवाह सम्पन्न होता है और वह बीते हुए दिनों की मधुर स्मृति आँखों में सजाकर दुल्हन बनकर हँसी-खुशी अनुपम के घर चली जाती है।
संस्कार सन्देश -
हमें किसी की शरीरिक बनावट या रंग-रूप का मज़ाक न बनाकर उसको गुणों का सम्मान करना चाहिए।
कहानीकार-
#ब्रजेश_सिंह (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बीठना
लोधा, अलीगढ़ (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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