असली गणतंत्र
ध्वज फहरा देना केवल
अपना धर्म नहीं है।
सबको सम अधिकार मिले
समझो गणतंत्र वही है।
और अगर बतलाएँ तो
गणतंत्र का मतलब क्या है?
जब बेटी, बहु सुरक्षित हों
और न्याय जहाँ फलता है।
शिक्षित हों हर वर्ग के बच्चे
हर सपना भी संरक्षित हो।
जाति-धर्म की दीवारें
मानवता से कटती हों।
अधिकारों के साथ अगर
कर्तव्य भी सभी निभाएँ।
न भय, न ही भेदभाव हो
कोई भूखा न सो पाए।
संविधान की हर पंक्ति
जीवन का राग जगाए।
बढ़े तिरंगे की और शान
भारत फिर से जगमगाए।
हर हृदय भरा हो देश प्रेम से
तब गणतंत्र सार्थक कहलाए।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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