11/2026, बाल कहानी- 30 जनवरी

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 11/2026
*30 जनवरी 2026 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी- #जीवन_बहुत_कीमती_है
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चौदह-पन्द्रह साल की मासूम-सी बच्ची सीमा हाॅस्पिटल के बैड पर लेटी हुई है। उसका पूरा शरीर नीला पड़ा हुआ है। वह आज जिन्दगी और मौत के बीच झूल रही है। माता-पिता रिश्तेदार सब उसके आस-पास हैं। वे सब उसके जीवन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। सबको बहुत हैरानी है कि हँसमुख और खुशमिजाज सीमा ने आखिर खुदकुशी जैसा गलत कदम क्यूँ उठाया? सबके मन में बस एक ही सवाल है कि, "सीमा जैसी लड़की ने ऐसा क्यों किया?"
होश में आने पर सीमा बताती है कि किस तरह स्कूल में लड़के उसे परेशान करते थे। माँ-पापा, टीचर सबने उसके द्वारा शिकायत करने पर उसको गम्भीरता से नहीं लिया था। वह उनकी प्रताड़ना से बहुत परेशान थी, लेकिन कोई उसकी बात नहीं सुनता था। उन लडकों की हिम्मत दिन व दिन बढ़ती जा रही थी। वे लोग सीमा को परेशान करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे। 
स्कूल के टूर वाले दिन उनकी बदतमीजी की हद ही पार हो गई। उन्होंने सीमा के बैग में किसी बच्चे का फोन रख दिया। जब फोन खोने का पता चला तो सब जगह फोन ढूँढा गया लेकिन नहीं मिला। आखिरकार थक-हारकर टीचर ने टूर माॅनिटर से कहा कि, "सब बच्चों के बैग की तलाशी ली जाये।" सब बच्चों के बैग की तलाशी लेने की शुरुआत हुई। वह फोन सीमा के बैग में ही मिला। टीचर ने उसको बहुत डाँटा! वह बार-बार मना करती रहीं कि, "उसने चोरी नहीं की..उसने चोरी नहीं की।" लेकिन उसकी बात पर किसी ने भी विश्वास नहीं किया। इतने से उन शैतान लड़कों का मन नहीं भरा। उनको फिर से एक शरारत सूझी! उन्होंने 'मैं चोर हूँ' की पर्ची बनाकर चुपचाप से सीमा की कमीज पर लगा दी। सब लोग उसको चोर-चोर कहकर चिल्लाने लगे। सीमा से यह सब सहन नहीं हुआ। वह जोर से रोने लगी। उसे बहुत गहरा आघात लगा था। उसने घर आकर आत्महत्या करने का फैसला लिया। उसको मार्टिन की रीफिल मिल जाती है और वह उसे पूरा पी जाती है। 
सीमा के माता-पिता अपने आप पर बहुत शर्मिन्दा हैं कि वे अपनी बेटी के इतनी बार शिकायत करने पर भी उसकी बात नहीं सुनते थे। अब वह लोग तुरन्त स्कूल जाते है और प्रिसिंपल को सारी बात बताते हैं। वे उन लड़कों को अपने आफिस में बुलाती हैं और कहती है कि, "तुम्हें स्कूल से निकाला जाता है।" लड़के रोने लगते है और प्रिसिंपल के पैर पकड़ लेते है कि, "उनके साथ ऐसा न करें।" सीमा के माता-पिता के कहने पर वे उनको स्कूल से न निकालने के लिए मान जाती हैं। वे उनको प्यार से समझाती हैं और बहुत डाँटती भी है कि, "आगे से शिकायत का कोई मौका नहीं आना चाहिए।" वे लोग भी अपने आप पर बहुत शर्मिन्दा है और भविष्य में फिर कभी ऐसा न करने की कसम खाते हैं।

#संस्कार_सन्देश -
हमें अपने बच्चों की छोटी से छोटी बात को भी अच्छी तरह से सुनना चाहिए और कोई परेशानी होने पर उनका साथ देना चाहिए।

कहानीकार-
#ब्रजेश_सिंह (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बीठना 
लोधा, अलीगढ़ (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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