07/2026, बाल कहानी- 24 जनवरी
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 07/2026
*24 जनवरी 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #समझदारी_का_परिचय
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एक समय की बात है, तीन बहुत ही घनिष्ठ दोस्त हुआ करती थीं। तीनों ही जब भी कहीं जातीं तो साथ जाते। वे साथ खातीं, साथ रहतीं और साथ घूमा करती थीं।
एक दिन एक दोस्त को मस्ती करने का मन किया और वह रात के नौ बजे अपने मित्र से बोली, "मेरा बहुत मन कर रहा है कि कहीं बाहर घूम कर आयें।" दोनों दोस्तों ने कहा, "नहीं..नहीं.. यह गलत बात है। इतनी रात को हमें बाहर नहीं जाना चाहिए, क्योंकि आजकल समय बहुत खराब है। लोग अकेले लड़कियों को देखकर तुरन्त उन्हें अपना शिकार बनाने का प्रयास करते हैं और कभी-कभी तो परेशान भी करते हैं।" फिर अपनी बहादुरी का परिचय देते हुए पहली वाली लड़की बोली, "नहीं ! नहीं ! हमें डरना नहीं चाहिए और क्या मजाल किसी की, हिम्मत हो जो हम पर उँगली भी उठा पायें और वैसे भी मैं तो जूडो-कराटे चैंपियन हूँ।" तब भी दूसरी मित्रों ने कहा, "नहीं..नहीं.. बहन! फिर भी हमें सावधानी बरतनी चाहिए। इतनी भी निर्भीकता नहीं दिखानी चाहिए।" लेकिन वह तीसरी दोस्त बिल्कुल भी नहीं मानी और उसने कहा, "तुम लोग चलो तो, चलो! नहीं तो आज मैं अकेली ही चली जाऊँगी।" दोस्तों को लगा कि, "आज हमारी मित्र हमसे गुस्सा हो गई है और वह बिना बताये अगर कहीं बाहर अकेले चली गयी तो और भी ज्यादा डर है। चलो, हम लोग इसका साथ नहीं छोड़ते हैं। हम सब लोग साथ में चलते हैं।" तीनों लोग खुशी-खुशी मस्ती करते हुए बाहर निकल गयीं।
अन्धेरी रात थी। चारों तरफ ठण्डी-ठण्डी हवा चल रही थी। उनको तो बहुत मजा आ रहा था और इतना मजा आ रहा था कि वह थोड़ी दूर जाकर बोलीं, "देखते हैं, कोई यहाँ पर ढाबा हो तो हम लोग बढ़िया-बढ़िया गरम-गरम खाना खाते हैं।" सब ने कहा, "नहीं.. नहीं.. इतना घूम लिए, अब हमें वापस चलना चाहिए और खाना तो हम घर पर भी खा सकते हैं।" लेकिन तीसरी दोस्त को तो आज मस्ती सवार थी और वह मस्ती के पूरे मूड में थी और बोली, "नहीं! आज तो मैं बाहर ही खाना खाऊँगी। चलो, हम सब एक साथ खाना खाते हैं।" सब के खाने का मूल्य मैं ही चुकाऊँगी।"
एक रेस्टोरेंट में वह जाते हैं और टेबल पर बैठकर वह लड़की बहुत मस्ती करती हैं। टेबल पर हाथ से ढोलक बजाते हुए गाना गाने लगती हैं। यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे। छोड़ेंगे दम, मगर साथ नहीं छोड़ेंगे।" दूसरी दोस्तों को भी मस्ती आने लगती है। वह भी मस्ती में गुनगुनाने लगती हैं और खूब मजे करते हैं। तब तक खाना आ जाता है और सब के सब मिलकर बढ़िया-बढ़िया खाना खाते हैं। इतने में बहुत ज्यादा देर हो चुकी होती है। घर में उनके मम्मी पापा इन्तजार कर रहे होते हैं लेकिन फिर भी किसी बात की चिन्ता नहीं लगती है। वह सोचते हैं कि मम्मी-पापा चिन्ता नहीं कर रहे होंगे? चलो, धीरे-धीरे टहलते हुए हम लोग थोड़ी दूर चलते हैं और खाना भी हमारा पच जाएगा।" फिर भी दूसरी दोनों दोस्त बोलती हैं, "आज कुछ ज्यादा ही मस्ती हो गई है। चलो, पैदल मत चलो! रात हो गई है। हमें घर भी जाना है। मम्मी-पापा चिन्ता कर रहे होंगे।" उतने में सामने से दो-तीन मसकरे लड़के आ रहे होते हैं। वह देखते हैं कि लड़कियाँ अकेले हैं। चलो, इनको परेशान किया जाए। तभी सब लड़कियाँ इस बात को भाँप जाती हैं कि ये लड़के हमें परेशान करने के मूड में हैं। जल्दी से ऑटो बुलाती हैँ और चल देती हैं, तब तक पीछे से एक बहुत तेज रफ्तार से गाड़ी आ रही होती है। ऑटो जब तक एक तरफ आता, इतनी देर में उसकी किनारी से ठोकर लग जाती है और घसीटकर एक लड़की को बाहर खींच लेते हैं। वह लड़की धड़ाम से जमीन में गिर जाती है लेकिन दूसरी लड़की उसको जोर से पकड़े रहती है ताकि वह ना गिरे लेकिन उसके धोखे में दूसरी लड़की जो जूडो-कराटे में माहिर थी, वह भी जमीन में गिर जाती है।
अब तीसरी लड़की जो कि जिसको जूडो-कराटे तो नहीं आते थे लेकिन बहुत होशियार लड़की थी। इतनी होशियार और समझदार लड़की आज तक देखने को नहीं मिलती। पुलिस स्टेशन पर फोन करके पुलिस की मदद से इलाज कराती है। ऐसा नहीं कि उस तीसरी वाली लड़की के चोट नहीं लगती है, फिर भी अपनी हिम्मत से सबको सही सलामत घर पहुँचाती है। सभी लोग उस लड़की की बहुत तारीफ करते हैँ l
#संस्कार_सन्देश -
हमें कभी भी जरूरत से ज्यादा निडरता नहीं दिखानी चाहिए। ठीक है हमें जूडो-कराटे आते हैं। आज हम हिम्मत वाले हो गये हैं लेकिन फिर भी आ बैल मुझे मार का परिचय नहीं देना चाहिए।
कहानीकार-
#अंजनी_अग्रवाल(स०अ०))
सेमरुआ, सरसौल
कानपुर नगर (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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