पावन दिन
आज वही पावन दिन
जब लिखी गई श्रद्धा गाथा।
आस्था ने परचम लहराया
मिटी हृदय की व्यथा।
मन की निश्छल ईंटों से
सजा श्रद्धा- विश्वास शिखर।
संयम, त्याग, करुणा से
उद्दीप्त हुआ अयोध्या नगर।
राम नहीं केवल नाम
वह जीवन का उजला पथ है।
जो जीवन को सुगम करे
राम नाम बस वो रथ है।
अयोध्या की घंटा-ध्वनि
दे रही हमें ये संदेश
विवेक, त्याग, प्रेम, धैर्य से
बनता उज्ज्वल परिवेश।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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