युवा दिवस:स्वामी विवेकानंद
श्रद्धा हो अंधविश्वास नहीं
तर्क करो अहंकार नहीं।
हृदय और विवेक संतुलित
जीवन न होने देते विचलित।
डर को अपने मन से हटाओ
संघर्ष करो आगे बढ़ जाओ।
हर बार शून्य से शुरू कर सको
ऐसा उम्दा चरित्र बनाओ।
विवेकानंद का यही सन्देश
अपने भीतर का दीप जगाओ।
नकल नहीं, नव सृजन करो
आस्था के संग विवेक रखो।
तन- मन दोनों हो मजबूत
राष्ट्र निर्माण का संकल्प धरो।
धर्म वही जो बल दे भीतर
जड़ भारत की मजबूत करे।
आध्यात्म, तर्क और कर्म
सशक्त भारत का बने मर्म।
युवाओं उठ जागो फिर से
भारत का उत्कर्ष करो।
जितना संभव हो लड़ो- लड़ो
खुद के संग ये देश गढ़ो।
जो वंचित पीड़ा से भरे पड़े
उनकी पीड़ा भी हरो- हरो।
सब ईश्वर की संताने हैं
सबमें ऊर्जा उल्लास भरो।
रचयिता
डॉ0 निशा मौर्या,
सहायक अध्यापक,
प्राथमिक विद्यालय मीरजहांपुर,
विकास खण्ड-कौड़िहार-1,
जनपद-प्रयागराज।

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