04/2026, बाल कहानी- 20 जनवरी

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 04/2026
*20 जनवरी 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी - #भक्ति_में_शक्ति
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एक गाँव में मोहन नाम का ब्यक्ति रहता था। वह श्रीकृष्ण भगवान की सदा पूजा-पाठ किया करता था। वह बहुत साँवला था इसलिए भगवान की पूजा करते समय भगवान श्रीकृष्ण से गोरे होने का वर माँगता था। गाँव में कोई काम नहीं मिलने के कारण वह कुछ पैसे लेकर काम की तलाश में एक दिन शहर आया। शहर की चकाचौंध देखकर वह बहुत खुश हुआ। वह रोज किसी होटल, किराना-दूकान और कपड़े की दूकानों में काम माँगने जाता था, पर कोई उसे काम नहीं देते थे क्योंकि मोहन बहुत साँवला था। कोई उसे पसन्द नहीं करता था। इस तरह से सप्ताह भर हो गया था। घर से कुछ रूपए लेकर गया था, जिससे वह सप्ताह भर गुजर-बसर कर सके। एक सप्ताह हो जाने पर अब उसके पास पैसे नहीं बचे थे।
अगले दिन वह भूखे-प्यासे ही काम की तलाश में शहर में भटक रहा था, पर उस दिन भी उसे किसी ने काम नहीं दिया। अब वह भूख से बहुत कमजोर हो गया था। वह एक पेड़ के पास आकर बैठ गया और अपने आप पर क्रोध कर रहा था कि, "मुझे शहर नहीं आना था। गाँव में ही खेती-बाड़ी करना था। अब मैं क्या करूँ? पैसे भी खत्म हो गये।" इतने में एक ट्रक आकर वहीं रूका। वह ट्रक मुल्तानी मिट्टी की बोरी से भरा हुआ था। ट्रक से दो आदमी नीचे उतरे और वही पेड़ के नीचे भोजन पकाने लगे। जब भोजन तैयार हुआ तो वे लोग जैसे ही भोजन थाली में लगा रहे थे, उसी समय उनकी नजर उस मोहन पर पड़ी। उन्होंने उनको बुलाया और उसे भी भोजन दिया। भोजन करने के बाद उन्होंने उसके बारे में उससे पूछा। मोहन ने अपनी सारी व्यथा उनको बतायी। वे लोग मोहन से बोले कि, "यदि तुम्हें दिक्कत न हो तो हमारे साथ काम कर सकते हो। एक दिन का पाँच सौ रूपये मिलेंगे। तुम्हें मूलतानी मिट्टी से भरे बोरों को ट्रक से निकाल कर गोदाम में रखना होगा।" मोहन क्या करता! उसके पास पैसे भी नहीं थे। घर वापस आने के लिए। वह तैयार हो गया। ट्रकवाले उसे अपने साथ ले गये। गोदाम पहुँचकर तीनों ट्रक से बोरी उतारने लगे। जब ट्रक खाली हो गया तो उन लोगों ने मोहन को पाँच सौ रूपए दिए और फिर से मोहन से बोले कि, "यदि वह उनके साथ काम करेगा तो उसे हर बार एक ट्रक खाली करने का पाँच सौ रूपये दिया जायेगा। मोहन उनके साथ काम करने को फिर से तैयार हो गया और उसने उनके साथ काम करने के लिए 'हाँ' कहा। 
अब मोहन रोज उनके साथ एक दिन में दो ट्रक मूलतानी मिट्टी खाली कर लेता था। उसे एक दिन का एक हजार रूपए मिलने लगा। इस तरह मोहन लगातार एक महीने तक उनके साथ काम कर लिया और तीस हजार रूपए कमा लिए। मोहन जब से ट्रकवाले आदमियों के साथ काम कर रहा था। तब से नहाया नहीं था। एक महीने बाद उसने उन लोगों से पैसे लिए और एक सप्ताह की छुट्टी माँगी ताकि अच्छे से नहा ले और पहनने के लिए कपड़े आदि खरीद सके। 
वह एक कपड़े की दूकान पर गया। उसने कुछ कपड़े खरीदे, फिर किराना-दुकान से साबून-तेल आदि खरीदा। फिर वह नदी में जाकर स्नान करने लगा। नदी में एक डूबकी लगाकर उसने अपने शरीर पर साबून लगाया और रगड़-रगड़ कर सफाई करने लगा। मुल्तानी मिट्टी शरीर में जमा हो गयी थी इसलिए वह उसे बहुत रगड़ कर साफ कर रहा था। फिर उसने नदी में छलाँग लगायी। जैसे ही नदी से बाहर निकला तो देखा कि उसका शरीर पूरा गोरा हो गया था। वह अचम्भित हो गया और सोचने लगा कि वह बहुत काला था, पर अचानक वह गोरा कैसे हो गया? नदी के किनारे एक साधु बाबा का आश्रम था। वहाँ जाकर उसने बाबा को सब कुछ बताया और पूछा कि, "ऐसा चमत्कार कैसे हो गया?" बाबा ने ध्यान लगाया और देखा तो वे ट्रक वाले आदमी के रूप में फरिश्ते थे और वह फरिश्ते और कोई नहीं, स्वयं कृष्ण भगवान जी आये थे क्योंकि मोहन श्रीकृष्ण जी की बहुत भक्ति करते थे इसलिए स्वयं भगवान कृष्ण जी आदमी का रूप लेकर उसकी मदद करने आये थे और उसे गोरा बनाकर चले गये। साधु बाबा ने मोहन को बताया। यह सुनकर मोहन बहुत प्रसन्न हो गया और भगवान को मन‌‌ ही मन 'धन्यवाद' दिया।

#संस्कार_सन्देश - 
हमें जीवन में अपना कर्म करते रहना है और ईश्वर को नहीं भूलना है क्योंकि भगवान जी अपने भक्तों का सदा साथ देते हैं।
                       
कहानीकार-
#प्रेमलाल_किशन (स०शि०)
शासकीय प्रा० वि० बुढ़नपुर 
संकुल-केन्द्र - गहरीनमुड़ा 
विकासखण्ड व जिला-सक्ती, छत्तीसगढ़

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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