मेरी शान है तिरंगा

मेरी शान है तिरंगा,
मेरी जान है तिरंगा,
मिट जाऊँ मैं वतन पर,
अरमान है तिरंगा।

जितना लहू है तन में,
संकल्प है ये मन में,
झुकने कभी न दूँगा,
ईमान है तिरंगा।

कितनी भी मुश्किलें हो,
कितने भी मिले नश्तर,
पर हँसते हुए मिलेंगे,
मुस्कान है तिरंगा।

कितनी निशा घनी हो,
कितना कठिन समय हो,
कुरबानियों की गाथा,
नित" प्रभात "ही लिखेंगे,
पहचान है तिरंगा
मेरी जान है तिरंगा।

रचयिता
प्रभात त्रिपाठी गोरखपुरी,
सहायक अध्यापक,
बेसिक शिक्षा परिषद गोरखपुर।।

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