हे नवल वर्ष अभिनन्दन

हे नवल वर्ष अभिनन्दन!
हे नवल वर्ष अभिनन्दन!
स्वागत में आगत कल के
पुलकित-हर्षित है तन-मन
हे नवल वर्ष अभिनन्दन!!

नयनों में स्वप्न सलोने
उर आशा-दीप जलाकर,
विस्मृत कर बीती कटुता
मृदु मुस्कानें बिखराकर।
तुम मन्द पवन सम आओ
सुरभित हो मन का उपवन!
हे नवल वर्ष अभिनन्दन!!

सच हो जाएं सब सपने
संग रहें सभी के अपने
मतभेद मिटें हृदयों से
सब लगें मन्त्र एक जपने
बस प्रेम ही दे दिखलाई
अब ऐसा लाना दरपन!
हे नवल वर्ष अभिनन्दन!

न गोद कोई सूनी हो
नहीं मांग कोई भी उजड़े
अँधियारा ना अब छाए
नहीं निष्ठुर बदरी उमड़े
सबके सब ही अपने हो
ऐसा बरसाना सावन!
हे नवल वर्ष अभिनन्दन!!

रचयिता
डॉ0 श्वेता सिंह गौर
सहायक शिक्षिका 
कन्या जूनियर हाई स्कूल बावन,
हरदोई।

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