विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस

हरी-भरी  हो धरती अपनी,

नदी, पहाड़, सागर, अवनी।

इन सब में बसते हैं जीवन,

पर्यावरण में ही रमते हैं मन।। 


मस्त मंद पवन जब है बहती, 

झूम के गंगा, सागर में मिलती।

डाली-डाली पर चहकते परिंदे 

फूलों की खुशबू सुरभित करती।।  


जल, थल, नभचर के हैं साथी, 

प्राकृतिक चक्र से सृष्टि है बनाती।

वृक्ष लगायें, प्रदूषण दूर भगायें, 

धरा को सुन्दर, हरित है बनाती।।


प्रतिवर्ष  26 नवम्बर को,

विश्व पर्यावरण संरक्षण दिवस मनाते हैं।

पर्यावरण सुरक्षा से ही है जीवन,

विश्व में जन-जागरूकता लाते हैं।।


रचयिता

वन्दना यादव "गज़ल"
सहायक अध्यापक,

अभिनव प्रा० वि० चन्दवक,

विकास खण्ड-डोभी, 
जनपद-जौनपुर।

Comments

Total Pageviews