06/2024- बाल कहानी, 23 जनवरी 2024

बाल कहानी- घमण्डी किसान
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गुलरी गाँव में एक घमण्डी किसान तेजसिंह रहता था। वह अपनी फसलों की अच्छी उपज होने के कारण गुलरी गांँव में सबसे अधिक धनवान व्यक्ति था। इसलिए हमेशा अपने धन और वैभव को लेकर बड़ा अभिमान करता था और दूसरों को नीचे दिखाने की कोशिश करता था। 
एक दिन तेजसिंह अपने खेतों के लिए बीज खरीदने शहर गया हुआ था। वापस आते समय शाम होने लगी। रास्ते में एक सुनसान जगह अचानक उसकी गाड़ी खराब हो गयी। वह और उसके नौकर दोनों लगे रहे, पर गाड़ी ठीक न हुई। रात का अंँधेरा भी गहरा होता जा रहा था। उस जगह अक्सर चोरों द्वारा लूटपाट की घटनाएँ होती रहती थी, यह सोंचकर तेजसिंह को थोड़ी घबराहट होने लगी थी, तभी किसी ने टार्च की रोशनी जलायी और कुछ लोग पास आने लगे। वे दो-तीन लोग थे, और अपने चेहरे किसी कपड़े से ढके हुए थे। जब तक कुछ समझ में आता, उन सभी ने आकर तेजसिंह और उसके नौकर को आकर जोर से पकड़ लिया।
और चाकू दिखाकर कहने लगे, "जो कुछ भी माल-रूपये हैं, सब निकालो! वरना हम खुद ही निकाल लेंगे।"
और तेजसिंह को गिराकर सीने पर चाकू रखकर बैठ गया। तेजसिंह स्वयं को बड़ा असहाय महसूस करने लगा। किन्तु इस रात के अँधेरे में कौन आएगा‌ उसकी मदद को!
यह सोंचकर बाकी बचे हुए पैसे और पहनी हुई अँगूठी व सोने की चेन आदि सब उन लुटेरों को देने के लिए उतारने लगा।
तभी पुलिस की दो गाड़ियांँ तेजी से पास आकर रूकी और फटाफट बहुत सारे वर्दीधारी पुलिसकर्मियों ने उन सभी लुटेरों को बन्दूकें दिखाकर घेर लिया।
और चेतावनी दी‌ कि यदि कोई चालाकी की, तो गोली चला देंगे।
सभी लुटेरे पकड़े गये। तेजसिंह और उसका नौकर बच गये। तभी उजाले में तेजसिंह ने देखा, पुलिस के साथ उसके पड़ोसी रामू और हरी भी थे, जिनसे तेजसिंह कभी सीधे मुँह बात भी नहीं करता था।
पुलिस वालों ने बताया कि इन दोनों लोगों ने ही हम सबको बताया था कि यहाँ तुम दोनों के साथ लूटपाट हो रही है। हम यहीं पड़ोस में बनी पुलिस चौकी पर रहते हैं, फौरन आ गये।"
तेजसिंह ने हाथ जोड़ लिए और बोला रामू और हरी, तुम दोनों न होते तो आज ये लुटेरे शायद मेरी जान भी ले लेते। मुझे मुसीबत में देखकर तुम चाहते तो चुपचाप अपने घर जा सकते थे, लेकिन तुम लोगों ने भले इन्सान बनकर मेरी जान बचायी।"
             हरी ने कहा, "नहीं तेजसिंह, हमने तो बस पड़ोसी होने का फर्ज़ पूरा किया है। हम दोनों साइकिल से आ रहे थे, तभी तुम सब पर नजर पड़ी, तो वापस साइकिल से भागकर पुलिस चौकी पर सूचना दी।"
उस दिन से बाद घमण्डी किसान तेजसिंह ने अपने धन और समृद्धि पर घमण्ड करना छोड़कर‌ सबसे विनम्र व्यवहार करना शुरू कर दिया। तेजसिंह समझ चुका था कि मुश्किल के समय हमारे आसपास के लोग ही हमारी सहायता करते हैं।

संस्कार संदेश
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने धन या शक्ति पर कभी घमण्ड नहीं करना चाहिए। 


✍️👩‍🏫लेखिका-
शिखा वर्मा (इं०प्र०अ०)
उ० प्रा०वि० स्योढ़ा
बिसवाँ, सीतापुर


✏️ संकलन
📝टीम मिशन शिक्षण संवाद 
  नैतिक प्रभात

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