191/2026, बाल कहानी- 29 अक्टूबर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 191/2026
*29 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #हरियाली_देवी
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रामपुर गाँव में घना जंगल था। उस जंगल में बहुत से मोर थे। वे अपनी मधुर और संगीतमयी बोली और आकर्षक नृत्य से सबका मन लुभाते थे। उस जंगल में बहुत दूर-दूर से लोग अपने बच्चों को लेकर आते थे। अनेक कवि और लेखक तथा शोधकर्ताओं के लिए भी वह जंगल आकर्षण का केन्द्र था। उस जंगल के नदी, पर्वत, तालाब और झील, घाटियाँ सभी दर्शनीय थे। प्रकृति की मनोहारी और सुन्दर छबि के दर्शन तो एकमात्र जैसे वहीं होते थे। यूट्यूबरों और इन्स्ट्राग्राम और फेसबुक वालों तथा मीडिया के लिए वह उत्सुकता और कौतूहल से भरी हुई अनोखी जगह थी। सभी लोग यहाँ से बहुत कुछ अपने में संजोये, समेटे ले जाते थे। यहाँ की शुद्ध और प्रकृतिक हवा में अनेक लोग रोगों से मुक्त हो गये थे। लोग यहाँ पर्वत की चोटियों पर झोंपड़ी बनाकर रहते थे और कुछ दिन यहाँ का आनन्द लेते थे। यहाँ आने पर दु:ख, चिन्ता, तनाव, अवसाद और रोग-विकार सब अनायास ही खो जाते थे।
एक दिन सभी लोगों ने यहाँ पर्वत की एक चौड़ी बिशाल चोटी पर सीढ़ियाँ लगवाकर एक भव्य मन्दिर बनवा दिया। उसके चारों ओर ऊपर और नीचे ठहरने के लिए सरांय बनवा दी गयीं। मन्दिर बनने और उसमें हरियाली देवी की प्रतिष्ठा होने से वहाँ दुकानें भी लगने लगीं। अब वहाँ धीरे-धीरे एक बस्ती बन गयी। लोगों को एक आय का जरिया मिल गया। बच्चे वहाँ बहुत कुछ सीखते और अपने गाँव में सबको और अध्यापकों भी बताते। 
इस प्रकार एक नवाचार पद्घति विकसित हुई। सरकार ने उसे पर्यटन की दृष्टि से उचित पाकर वहाँ के लिए सड़क मार्ग बनवा दिया और बसें भी चलने लगीं। इस प्रकार माँ हरियाली देवी की कृपा और आशीष से चारों ओर चमन बरसने लगा। प्रकृति में लोग अपने परिवार का ही दर्शन और अपनों का स्पर्श अनुभव करते थे।

#संस्कार_सन्देश -
प्रकृति से हमारा रिश्ता जन्म से ही है। हम एक-दूसरे के परिपूरक है। अत: हमें प्रकृति का संरक्षण करना चाहिए।

कहानीकार-
#जुगल_किशोर_त्रिपाठी
प्रा० वि० बम्हौरी (कम्पोजिट)
मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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