185/2026, बाल कहानी- 17 अक्टूबर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 185/2026
*17 अक्टूबर 2026 (शनिवार)*
#बाल_कहानी - #साइकिल_वाली_दीदी
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बौखर तहसील सरीला का एक छोटा-सा गाँव है। ग्राम बौखर में एक लड़की थी- सविता। सब उसे "सुमन की बिटिया" कहते थे। सुमन यानी उसकी माँ, जो खेतों में मजदूरी करती थी। पिता जी बचपन में ही छोड़कर चले गये थे। सविता पढ़ने में बहुत तेज थी। दसवीं की परीक्षा में सविता सरीला ब्लॉक में पहले नंबर पर आयी। जी०आई०सी० विद्यालय सरीला के प्रधानाचार्य महोदय जी ने कहा, "इसे आगे पढ़ाओ, ये कुछ करेगी।" 
पर माँ के पास पैसे नहीं थे। रिश्तेदारों ने कहा, "बिटिया को अब इलाहाबाद शहर भेज कर क्या करोगी? सत्रह साल की हो गई, शादी के लिए वर देखो। अकेली लड़की इतने बड़े शहर में कहाँ और कैसे रहेगी।" 
माँ चुप रही। रात को सविता ने माँ को रोते हुए देखा। अगले दिन सविता ने कुछ ऐसा किया जो गाँव में किसी लड़की ने नहीं किया था। वो अपनी पुरानी साइकिल लेकर सरीला ब्लॉक के ऑफिस चली गई। वहाँ उसे पता चला था कि सरकार लड़कियों के लिए सिलाई सेंटर खोलने को मशीनें देती है। वहाँ के बाबू ने हँसकर कहा, "तुमसे नहीं होगा बिटिया। फॉर्म भरना आता है?" सविता ने बाबू जी के समक्ष पूरा फॉर्म अंग्रेजी में भर दिया। पन्द्रह दिन में उसे तीन सिलाई मशीनें मिलीं। उसने बौखर गाँव में अपने ही घर के एक कमरे में सेंटर खोला। बोर्ड पर लिखा, "सविता सिलाई केंद्र। यहाँ लड़कियों को सिलाई फ्री सिखाई जाती है।" पहले दिन कोई नहीं आया। गाँव वाले बोले, "लड़की होकर दुकान खोलेगी?"
दूसरे दिन दो लड़कियाँ आयीं। तीसरे दिन पाँच। आज तीन साल हो गए। उसी सेंटर में अब बारह मशीनें हैं। तीस लड़कियाँ रोज आती हैं। सविता ने ग्यारह लड़कियों की शादी के लिए खुद लहँगा सिला है, बिना एक रुपया लिए। और सबसे बड़ी बात कि उसने अपनी साइकिल अब भी रखी है। उसी साइकिल से वो अब आस-पास के गाँव की लड़कियों को बुलाने जाती है।
पिछले महीने जब जीतू ब्लॉक प्रमुख जी बौखर गाँव आये, तो उन्होंने सविता की माँ से पूछा, "आपकी बेटी क्या करती है?" माँ ने कहा, "मेरी बिटिया? लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाकर महिला सशक्तिकरण का कार्य करती है।" प्रमुख जी हँसे, "इसका मतलब?" माँ बोली, "मतलब ये कि अब गाँव की कोई बिटिया अपने आप को बोझ नहीं समझती। सबको लगता है, हम भी सविता बन सकते हैं।" नारी सशक्तिकरण का मतलब भाषण नहीं है। मतलब है- एक लड़की का खड़ा होना, ताकि उसके पीछे तीस और लड़कियाँ खड़ी हो सकें।

#संस्कार_सन्देश -
जब नारी सशक्त होगी, तभी देश सशक्त होगा। नारी शक्ति ही देश की असली शक्ति है। बेटी को पढ़ाओ, उसे आगे बढ़ाओ।

कहानीकार- 
#मिथुन_भारती (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बौखर
वि०क्षे० सरीला, जनपद- हमीरपुर

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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