176/2026, बाल कहानी - 06 अक्टूबर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 176 /2026
*06 अक्टूबर 2026 (मंगलवार)*
#बाल_कहानी- #हिम्मती_सैम
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एक गाँव में सैम नाम का एक लड़का रहता था। सैम बहुत होशियार था। वह पढ़ाई में सबसे तेज था, खेल में भी सबसे आगे रहता था। हर कोई कहता था, "सैम एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनेगा। सैम अपनी माँ से बहुत प्यार करता था।
एक दिन सैम अपनी माँ के साथ अपने मामा के यहाँ जा रहा था। दोनों गाड़ी में बैठे थे। रास्ते में बातें कर रहे थे, हँस रहे थे।
तभी अचानक पीछे से एक बड़ा ट्रक आया और उनकी गाड़ी से जोर से टकरा गया। बहुत बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे में सैम की माँ की मौत हो गई। सैम तो बच गया, लेकिन इस हादसे में उसने अपनी एक टाँग खो दी। अब सैम को नकली टाँग लग गई थी। वह लाठी के सहारे चलता था। इस हादसे के बाद सैम बिल्कुल टूट गया। उसने हिम्मत हार दी। उसने स्कूल जाना बन्द कर दिया क्योंकि उसे डर लगता था कि स्कूल के बच्चे उसे 'लँगड़ा-लँगड़ा' कहकर चिढ़ायेंगे। वह दिन-भर घर में बैठा रहता और रोता रहता।
एक दिन उसके पापा उसके पास आये। पापा ने प्यार से समझाया, "बेटा! सैम, सुनो। जिन्दगी में मुसीबत तो आती ही हैं। हमारे पास दो रास्ते होते हैं। एक रास्ता है कि हम रो कर बैठ जाएँ और हार मान लें। दूसरा रास्ता है कि हम परिस्थितियों से लड़ें और जीत हासिल करें। बेटा! तुम्हारी टाँग टूटी है, तुम्हारा हौसला नहीं टूटा है। तुम्हें लड़ना होगा।" पापा की बात सैम के दिल में बैठ गई।
सैम ने हिम्मत की और अगले ही दिन से स्कूल जाना शुरू कर दिया। पहले दिन कुछ बच्चों ने उसे 'लंगड़ा' कहकर चिढ़ाया। सैम को बहुत दु:ख हुआ, पर उसने पापा की बात याद रखी और चुपचाप पढ़ाई करता रहा।
उसने इतनी मेहनत की कि वह फिर से क्लास में पहले नंबर पर आ गया। एक टाँग के साथ भी वह सबसे होशियार निकला।
एक दिन स्कूल में एक बड़ी प्रतियोगिता हुई। वह दौड़ की प्रतियोगिता नहीं थी, बल्कि पढ़ाई की प्रतियोगिता थी।
सैम ने उस प्रतियोगिता में भाग लिया। उसने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया और उस प्रतियोगिता में भी वह पहले नंबर पर आया।
इनाम में सैम को विदेश में पढ़ने का मौका मिला।
सैम विदेश चला गया। वहाँ उसने दिन-रात मेहनत की और डॉक्टर बन गया।
आज सैम विदेश से डॉक्टर बन कर वापस आ गया है। वही बच्चे जो उसे कभी लँगड़ा कहते थे, आज उसे इज्जत से "डॉक्टर साहब" कहते हैं।
सैम कहता है, "मेरी एक टाँग हादसे ने छीन ली थी, पर मेरी हिम्मत कोई नहीं छीन सका।"
#संस्कार_सन्देश -
शरीर में कमी होने से कुछ नहीं होता, मन में हिम्मत होनी चाहिए, जो मुसीबतों से लड़ता है, वही जीतता है।
कहानीकार-
#ब्रजेश_सिंह (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बीठना
लोधा, अलीगढ़ (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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