190/2026, बाल कहानी- 28 अक्टूबर

l#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 190/2026
*28 अक्टूबर 2026 (बुधवार)*
#बाल_कहानी - #पिंकी_की_सीख
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रामपुर गाँव में एक बड़ा-सा बगीचा था, जिसमें गाँव के सारे बच्चे शाम को वहाँ खेलने आते थे गाँव के ही चिंटू, मोटू और पिंकी भी वहाँ खेलने जाते थे।
एक दिन बगीचा के माली ने बच्चों के खेलने के लिए वहाँ एक सुन्दर सुनहरे रंग का खिलौना रखा, जिसकी पत्ती 'सोने' जैसी लगती थी। सूरज की धूप उस पर पड़ती, तो वह और चमकने लगती थी। 
चिंटू और मोटू दोनों उस सुनहरी पत्ती को अकेले पाना चाहते थे।
चिंटू बोला, "यह मेरी है क्योंकि मैंने इसे देखा!"
मोटू ने जोर से कहा, "नहीं! यह मेरी है क्योंकि मैं सबसे ताकतवर हूँ!"
दोनों में उस पत्ती को लेकर बहस और फिर लड़ाई होने लगी। वे दोनों एक-दूसरे को धक्का देने लगे, जिससे बगीचे के नाजुक पौधे टूटने लगे और शान्ति भंग हो गई। सारे बच्चे भी डर कर एक किनारे खड़े हो गए।
पिंकी यह सब देख रही थी। वह समझ गई कि लड़ने से कभी कोई सही चीज नहीं मिलती। वह उनके पास गई और मीठे स्वर में बोली, "अरे मेरे प्यारे मित्रों! जरा रुको! क्या लड़ने से यह पत्ती तुम दोनों की हो जाएगी? ज़रा सोचो! अगर तुम इसे आपस में मिल-जुलकर इसके साथ खेलो, तो इसमें कितना आनन्द आयेगा!" देखो, तुम्हारी वजह से सारे बच्चे डर गए हैं और इस बगीचे में डर का माहौल फैल गया है। अब कोई नहीं खेल रहा है।
चिंटू और मोटू दोनों ने एक पल के लिए रुककर सोचा। उन्हें पिंकी की बात बिल्कुल सही लगी। उन्होंने अपनी लड़ाई बन्द कर दी और मुस्कुराते हुए उस सुनहरी पत्ती को मिलकर एक-दूसरे के साथ खेलने लगे। आज उन दोनों को पिंकी से एक नई सीख मिली थी कि चीजों को बाँटकर मिलजुल कर खेलना चाहिए।

#संस्कार_सन्देश -
लड़ाई-झगड़े से हमेशा नुकसान और दूरियाँ बढ़ती हैं, जबकि मिल-जुलकर रहने और बाँटने से हर समस्या का समाधान निकल जाता है।"

कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद 
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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