187/2026, बाल कहानी- 22 अक्टूबर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 187/2026
*22 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #सुई_से_सिला_भाग्य
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एक गाँव में एक छोटी-सी झोपड़ी में जीशा रहती थी। जीशा के पापा नहीं थे। जीशा की माँ दिन-रात कपड़े सिलती थी। मशीन चलाती, आँखें दु:खती, पर रुकती नहीं थी। वह जीशा और उसके छोटे भाई मनु को पढ़ा-लिखाकर बड़ा आदमी बनाना चाहती थी।
जीशा को पढ़ने का बहुत शौक था। फटी हुई किताब, टूटी हुई स्लेट, पर मन में बड़ा सपना। मनु भी दीदी के साथ बैठ कर "क, ख, ग" पढ़ता था।
माँ कहती, "जीशा, खूब पढ़ो। एक दिन तुम बड़ी अधिकारी बनोगी।"
सब कुछ ठीक चल रहा था।
फिर एक दिन माँ को बुखार आ गया। बुखार बढ़ता गया। दवा के पैसे नहीं थे। माँ दिन-रात खाँसती रही। कुछ दिन बाद माँ भी भगवान को प्यारी हो गई।
अब जीशा और मनु बिल्कुल अकेले रह गए। छोटी-सी झोपड़ी, खाली चूल्हा और दो छोटे-छोटे बच्चे। गाँव वाले बोले, "अब ये क्या करेंगे?"
पर जीशा ने हिम्मत नहीं हारी।
जीशा सुबह चार बजे उठती। लोगों के घर बर्तन माँजती, झाडू लगाती, खेत में काम करती। जो पैसे मिलते, उससे मनु के लिए दूध लाती और किताब लाती।
रात को जब मनु सो जाता, तो जीशा ढिबरी की रोशनी में पढ़ती। उसकी आँखों में आँसू होते, पर हाथ में कलम होती।
जीशा मनु को भी पढ़ाती, "मनु, लिख... माँ का सपना पूरा करना है।"
साल बीत गए। जीशा की मेहनत रंग लाई। जीशा और मनु दोनों दिन-रात पढ़कर बड़े अधिकारी बन गए। जीशा कलेक्टर बनी और मनु डॉक्टर।
आज जीशा की झोपड़ी की जगह उसका पक्का घर है, पर उस घर में आज भी माँ की सिलाई मशीन रखी है।
जीशा सबसे कहती है, "मेरी माँ ने सुई से मेरा भाग्य सिला था।"
#संस्कार_सन्देश -
हिम्मत कभी मत हारो। मेहनत और पढ़ाई से हर गरीबी, हर दु:ख को जीता जा सकता है। माँ-बाप का सपना ही सबसे बड़ा धन है।
कहानीकार-
#ब्रजेश_सिंह (स०अ०)
प्राथमिक विद्यालय बीठना
लोधा, अलीगढ़ (उ०प्र०)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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