184/2026, बाल कहानी-16 अक्टूबर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 184/2026
*16 सितम्बर 2026 (शुक्रवार)*
#बाल_कहानी - #पिंकी_का_साहस
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पिंकी एक छोटी से गाँव में रहती थी। उसके पापा खेती बाड़ी करते थे। पिंकी गाँव के ही प्राथमिक विद्यालय में कक्षा पाँच की छात्रा थी।
पिंकी बहुत होनहार छात्रा थी। वह घर के काम व विद्यालय की पढ़ाई समय पर करती थी, इस कारण में सब की लाडली थी।
एक बार पिंकी के प्राथमिक पाठशाला में 'मिशन शक्ति' अभियान के तहत एक विशेष शिविर का आयोजन हुआ था, जहाँ पुलिस अधिकारी मैडम ने बच्चों को आत्मनिर्भरता, सुरक्षा और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का पाठ पढ़ाया। महिलाओं के अधिकारों के बारे में विस्तार से बताया गया है।
शिविर में मिली सीख पिंकी के मन में गहराई से उतर गई और उसने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर '1090' और '112' को अपनी डायरी में नोट कर लिया।
कुछ ही दिनों बाद शाम के समय जब पिंकी अपनी सहेली के साथ बाज़ार से लौट रही थी, तो उसने देखा कि रास्ते के नुक्कड़ पर दो लड़के गाँव की एक छोटी बच्ची को डरा-धमका रहे थे। आस-पास कोई बड़ा व्यक्ति मौजूद नहीं था और बच्ची बहुत घबराई हुई थी। पिंकी पहले तो थोड़ा हिचकिचाई, लेकिन तभी उसे मिशन शक्ति शिविर में कही गई बात याद आई- "नारी सुरक्षा और सम्मान के लिए चुप्पी तोड़ना ही सबसे बड़ी ताकत है।"
पिंकी ने बिना डरे तुरन्त अपनी दादी को फोन करके पूरी बात बताई और साथ ही निर्भीक होकर '1090' महिला पावर लाइन पर कॉल करके सटीक लोकेशन दे दी। उसकी सूझ-बूझ और सही समय पर उठाए गए। कदम के कारण कुछ ही मिनटों में पुलिस की गाड़ी वहाँ पहुँच गई और बच्ची सुरक्षित बच गई। गाँव के सरपंच और थाना प्रभारी ने पिंकी की इस हिम्मत और जागरूकता के लिए पूरे स्कूल के सामने उसे सम्मानित किया। दादी ने गर्व से पिंकी को गले लगाया और कहा, "आज तुमने साबित कर दिया कि जब एक बेटी जागरूक होती है, तो वह पूरे समाज की ढाल बन जाती है।"
#संस्कार_सन्देश -
हमें अपनी बेटियों को शिक्षा देनी चाहिए साथ ही साथ मिशन शक्ति के तहत उन्हें जागरूक भी बनाना चाहिए।
कहानीकार-
#मृदुला_वर्मा (स०अ०)
प्रा० वि० अमरौधा प्रथम
अमरौधा (कानपुर देहात)
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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