175/2026, बाल कहानी- 05 अक्टूबर

#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 175/2026
*05 अक्टूबर 2026 (सोमवार)*
#बाल_कहानी- #चॉकलेट 
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रोहन अपनी नई साईकिल से बाजार जा रहा था। उसे घर के काम से कुछ सामान लाना था। माँ ने एक लम्बी लिस्ट दी थी। रोहन बहुत खुश था, क्योंकि बहुत दिनों बाद रोहन को दस रुपए चॉकलेट खाने को मिले थे।
रोहन ने देखा कि रास्ते में एक बुजुर्ग व्यक्ति धीरे-धीरे पैदल चलते हुए लड़खड़ा रहे हैं।
रोहन ने अपनी साइकिल रोक कर बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा, "दादा जी! आप कहाँ जा रहे हैं? आपकी तबियत ठीक नहीं लग रही है।"
"हाँ, बेटा! मैं बहुत दिनों से बीमार हूँ। डॉक्टर के पास जा रहा हूँ। कई घन्टे पहले घर से निकला हूँ, पर मुझे चक्कर आ रहा है इसलिए रुक-रुककर जा रहा हूँ।"
रोहन ने अपनी साईकिल पर दादाजी को बैठाने की कोशिश की, परन्तु असफल रहा, इसलिए रोहन ने दादा जी को एक पेड़ के नीचे बैठा दिया और वह थोड़ी दूर जाकर एक ऑटो रिक्शा दस रुपए में तय करके लिवा लाया।
वहाँ लोगों की मदद से रोहन ने दादा जी को ऑटो रिक्शा में बैठा दिया। दादा जी ने रोहन को खूब दुआ दी।
उसके बाद रोहन बाजार से सामान घर ले आया। माँ ने सामान देखकर पूछा, "तुम्हारी चॉकलेट कहाँ है?"
रोहन ने माँ के सवाल पर रास्ते का सारा किस्सा बता दिया। माँ को रोहन पर बहुत गर्व महसूस हुआ। माँ ने रोहन को गले से लगाकर नेक काम की शाबाशी दी और रोहन को दोबारा दस रुपये देते हुए बोली, "जाओ! एक चॉकलेट ले आओ, हम दोनों मिलकर खायेंगे।"
रोहन की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, वह बहुत खुश हुआ। जल्दी से चॉकलेट लाकर आया और माँ को प्यार से 'धन्यवाद' बोला।

#संस्कार_सन्देश-
हालात कैसे भी हों, हमें सदैव लोगों की मदद करनी चाहिए।

कहानीकार-
#शमा_परवीन
बहराइच (उत्तर प्रदेश)

✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात

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