183/2026, बाल कहानी- 15 अक्टूबर
#दैनिक_नैतिक_प्रभात - 183/2026
*15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार)*
#बाल_कहानी - #यातायात_के_नियम
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मोहन अभी पन्द्रह साल का था। उसे गाड़ी चलाने का बड़ा शौक था। वह अपने पिता जी की गाड़ी अक्सर चलाता था। मोहन के पिता काम के सिलसिले मे दो दिनों के लिये शहर गये थे। मोहन गाड़ी लेकर तेज गति से चलाते हुए अपने दोस्तों के साथ घूमने निकल गया। आज पिता जी का डर भी नहीं था कि जल्दी घर पहुँचना है। मोहन गाड़ी चलाने में इतना खुश था कि यातायात के नियमों के पालन का कोई ख्याल नहीं रहा। लापरवाही में मोहन गाड़ी की गति तेज कर रहा था कि अचानक सामने आ रही बस से टकरा गया।
मोहन और उसके दोस्तों को गम्भीर चोटें आयीं। सभी के अभिभावक परेशान हुए।
कई महीने अस्पताल में पड़े रहने पर मोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने पिताजी से माफी माँगते हुए कहा कि, "पिता जी! मुझे माफ कर दीजिये। मेरी वजह से आप को लोगों की बातें सुननी पड़ीं।"
पिता जी माफ़ करते हुए बोले, "बेटा! गलती मेरी भी है। मैंने तेरे शौक को बढ़ावा दिया। तू मेरा बेटा है। तेरी जिद को मैं 'हाँ' करता रहा, जबकि मुझे पहले ही तुझे समझा देना चाहिए था। अगर पहले ही तुझे समझा देता तो शायद तू आज ठीक होता। तुझे ईश्वर जल्द से जल्द ठीक करे। पर अब तू गाड़ी बड़ा होकर ही चलाना, जब यातायात के नियमों का पालन करना सीख जाये।"
-"ठीक है पिताजी! अब मैं सिर्फ पढ़ाई करुँगा। गाड़ी जब बड़ा हो जाऊँगा, तब ही चलाऊँगा, वो भी यातायात के नियमों का पालन करते हुये। आज मोहन के पिता बहुत खुश थे क्योंकि उसके बेटे में समझ आ चुकी थी।
#संस्कार_सन्देश -
हम सब का कर्तव्य है कि यातायात के नियमों का पालन हम स्वयं भी करें और दूसरों को भी यातायात के नियमों का पालन करने को कहे।
रचनाकार-
#शमा_परवीन
बहराइच, उत्तर प्रदेश
✏️संकलन
📝टीम #मिशन_शिक्षण_संवाद
#दैनिक_नैतिक_प्रभात
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